जी-20 सम्मेलन
देश में आज से जी-20 सम्मेलन का आगाज हो रहा है। यह सम्मेलन दो दिन तक चलेगा जिसमें सम्मिलित सदस्य देश वैश्विक मुद्दों का समाधान खोज कर एक सहमति बनाएंगे। जी-20 की अध्यक्षता सदस्य देश को बीस वर्ष के अंतरात पर मिलती है। इससे पहले 2003 में भारत जी-20 की अध्यक्षता कर चुका है।
गौरतलब है कि सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन समेत दुनिया के कई ताकतवर देश शामिल होने भारत आ रहे हैं। इसके अलावा बांग्लादेश, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात समेत नौ देशों को मेहमान के तौर पर बुलाया गया है। हालांकि सम्मेलन में रूस व चीन ने शामिल होने से मनाकर दिया है जिसको लेकर भारत ने प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि किसी के शामिल होने न होने से सम्मेलन में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
यह सम्मेलन ऐसे समय पर होने जा रहा है जब विश्व के एक हिस्से में अस्थिरता का माहौल है। एक ओर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश मुद्रास्फिति की वजह से आर्थिक मंदी से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से ऊर्जा व खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का संकट है। वहीं विश्व की कुछ अर्थव्यवस्थाएं कोविड के चलते अब तक ठीक स्थिति में नहीं आ पाई हैं।
इन मुद्दों से समझा जा सकता है कि सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ, रूस-यूक्रेन युद्ध के हल से संबंधित मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे। जानकारों का कहना है कि सम्मेलन में रूस के शामिल न होने से हो सकता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा न हो,लेकिन यहां यह बात समझनी होगी कि युद्ध भले ही दो देशों के बीच हो, उसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ता ही है।
इसके अलावा विश्व में जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन को लेकर गरीब देशों को मिलने वाली आर्थिक मदद, क्लीन एनर्जी को लेकर अल्प विकसित देशों को तकनीकी और आर्थिक मदद, खाद्यान्न सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। इस सम्मेलन में सभी सदस्य देश इन मुद्दों को एक मंच पर साझा कर उन पर कार्य करने की सहमति बनाएंगे।
सम्मेलन की थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात्् ‘एक पृथ्वी, एक कुटुंब, एक भविष्य’ है,पर अमल करते हुए भविष्य में विश्व को एक साथ लाने की रूपरेखा भी तैयार होगी। भारत की समृद्धि के लिए यह सम्मेलन अहम है, क्योंकि बड़ी जनसंख्या का देश होने के बावजूद भारत विश्व की आर्थिक उथल-पुथल के बीच भी मजबूत आर्थिक स्थिति में ही नहीं है, बल्कि विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था भी है।
भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को देखते हुए सम्मेलन में आने वाले देश भारत में व्यापारिक निवेश करने को प्रेरित होंगे जिससे भारत की वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह आसान होगी।
