लखनऊ: निजीकरण का खाका तैयार, विस्तृत रिपोर्ट तलब
अमत सिंह, लखनऊ। प्रदेश पावर कार्पोरेशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को निजी हाथों में देने की पूरी तैयारी कर चुका है। पॉवर कार्पोरेशन की ओर से एक दिन दिन पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से सभी जनपदों के वित्तीय पैरामीटर व तकनीकी पैरामीटर की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। प्रबंधन की कोशिश …
अमत सिंह, लखनऊ। प्रदेश पावर कार्पोरेशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को निजी हाथों में देने की पूरी तैयारी कर चुका है। पॉवर कार्पोरेशन की ओर से एक दिन दिन पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से सभी जनपदों के वित्तीय पैरामीटर व तकनीकी पैरामीटर की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
प्रबंधन की कोशिश है कि जल्द से जल्द यानि की कोरोना कॉल में ही पूर्वांचल को निजी हाथों में सौंप दिया जाए। कोरोना काल के प्राइवेटाइजेशन करने में प्रबंधन को आसानी होगी, कारण है कि इस दौरान बिजली संगठनों की ओर से बड़े आंदोलन का अंदेशा कम है।
गौरतलब है कि अभी तक किसी भी बिजली संगठन की ओर से निजीकरण को लेकर कोई बड़ी प्रतिक्रया सामने नहीं आई है। संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसा संगठन की निष्क्रयता के कारण हो रहा है। संगठनों की जो गतिविधि अभी तक दिखी है उससे नहीं लगता है कि वे पूर्वांचल के निजीकरण को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर हैं और न ही आंदोलन के मूड में है। हालांकि संगठन के कुछ नेता नेता, कर्मचारी और पदाधिकारियों के बयान जरूर सामने आए हैं।
कुछ समय पहले तक प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के लगभग सभी संगठनों को एक मंच पर लाने वाले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से संदेशात्मक आंदोलन पूरे प्रदेश में जरूर किया गया था, लेकिन उसके बाद से समिति की ओर से कोई भी गतिविधि सामने नहीं आई है। हालांकि समिति के पदाधिकारियों की ओर से दावा किया जा रहा है कि निजीकरण को किसी भी स्तर से नहीं होने दिया जाएगा।
बता दें कि निजीकरण सहित अवर अभियंता संवर्ग के तमाम समस्याओं को लेकर राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन की ओर से आठ सितंबर से लेकर 10 सितंबर तक यानि की 48 घंटे के लिए सत्याग्रह सहयोग आंदोलन किया गया था। इस दौरान संगठन की ओर से 48 घंटे का अनवरत काम कर प्रबंधन को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई थी।
इस दौरान आंदोलन के समाप्त होने के बाद संगठन की ओर से जल्द ही बड़े आंदोलन की बात कहीं गई थी लेकिन दो दिन बीत गए अभी तक संगठन के आंदोलन की कोई सुगबुगाहट नहीं है। जबकि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन की ओर से पूर्वांचल के सभी जनपदों के वित्तीय पैरामीटर व तकनीकी पैरामीटर की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली गई है।
पॉवर कार्पोरेशन की ओर से एक दिन दिन पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से सभी जनपदों के वित्तीय पैरामीटर व तकनीकी पैरामीटर की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। इस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से सवाल खड़े कर दिए गए हैं। परिषद की ओर से कहा गया कि प्रबंधन की ओर से गुपचुप तरीके से निजीकरण की तैयारी चल रही है। पूर्वांचल में स्टोर की स्थित सब स्टेशनों की सूचना, फिक्स्ड रजिस्टर इन्वेंट्री सहित अनेक सूचना मांगने का सीधा तात्पर्य है कुछ तो गड़बड़ है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि निजीकरण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं परिषद की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि पावर कार्पोरेशन के मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। पावर कार्पोरेशन को सबसे पहले नियामक आयोग आदेशानुसार प्रदेश की जनता को बताए कि की निजीकरण जनता के हित में कैसे है। अभी टोरेंट पावर की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अनुबंध के शर्तों को लागू करने में टोरेंट फेल हो गई है।
