आल इंडिया तरही शब्बेदारी : ... असगर का जिक्र होता है सारे जहान में
प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंची अंजुमनें, रात भर गूंजती रहीं नौहों की सदाएं
अयोध्या, अमृत विचार। अंजुमन गुंचे मज़लूमिया की ओर से शनिवार रात आयोजित आल इंडिया तरही शब्बेदारी में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई अंजुमनों ने शिरकत की। अर्शी फैजाबादी के मिसरे तरह मजहब की कैद है न तो सरहद की बंदिशें, असगर का जिक्र होता है सारे जहान में तरही कलाम पढ़े गए। शब्बेदारी में पूरी रात भारी तादाद में अजादार मौजूद रहे।
शनिवार रात भर अंजुमन गुंचाए मजलूमिया के सयोजन में शब्बेदारी में अन्य जिलों से आई अंजुमन व शहर फैजाबाद की अंजुमनों ने अर्शी फैजाबादी का तरही कलाम से कर्बला के 72 शहीदों को पुरसा दिया। पूर्व अध्यक्ष हामिद जाफर मीसम ने बताया कि शब्बेदारी में अंजुमन सोगवारे हुसैन वासिका अरबी कालेज से अलम उठाकर इमामबाड़ा जवाहर खा लाई। उसके बाद मौलाना हैदर अली ताबिश के संचालन में शब्बेदारी की शुरुआत हुई। शब्बेदारी की मजलिस मौलाना वसी हसन खां ने पढ़ी। उसके बाद मोहाफीजे अजा इलाहाबाद, जाफरिया दोसीपुरा बनारस, मजलूमिया कानपुर, असगरिया कदीम सुल्तानपुर व फैजाबाद की अंजुमनों में मासूमीया राठहवेली ने दानिश फैजाबादी का तरही सलाम "मजहब की कैद है न तो सरहद की बंदिशे,असगर का जिक्र होता है सारे जहान में " पढ़ा। वहीं बज्मे अब्बासिया मोती मस्जिद ने शायर सरवर नवाब का बागे जिना वहां है यहां रौजाए हुसैन, ये फर्क है ज़मीन में और आसमान में, पढ़ा व हुसैनिया वजीरगंज ने भी तरही कलाम पढ़ा।
रविवार सुबह नमाज के बाद अली असगर का झूला जामा मस्जिद से इमामबाड़ा लाया गया। जिसमें अंजुमन हुसैनिया व मासूमिया ने नौहाखवानी की। अन्त में नायब इमामे जुमा मौलाना नदीम रजा ज़ैदी ने तकरीर की। शब्बेदारी समाप्ति पर अंजुमन के अध्यक्ष अहमद जमीर सैफी व सचिव एजाज हैदर ने आयी हुई अंजुमनों व शहर के मोमनीन का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर जिला जज सरवर, शादाब हुसैन राजन, कैसर मेंहदी एडवोकेट, कामिल हसनैन, नायब सदर आरिफ आबिदी, मुनीर आबिदी, इजहार हुसैन छोटू , शुजात हुसैन वसीम, अरशद भाईजान, कासिम मेहदी रूही, कदर खा, मो हसनैन, सिबतैन मेहंदी श्यावर, इमरान जैदी, रिजवान हसनैन, जफर अब्बास, शकील अब्बास,हैदर अली, एहतेशाम हसनैन, फैजान मिर्जा, मंजर अदीब शैडो, भय्या खां, जाफर हुसैन बाबू, आसिफ रजा, हैदर मेंहदी आदि मौजूद रहे।
