मुरादाबाद के पारस ने योगा में बनाए दो विश्व कीर्तिमान
मुरादाबाद,अमृत विचार। मुरादाबाद के अब पारस सैनी पारसमणि हो गए। रविवार को योग में एक साथ दो विश्व कीर्तिमान बनाए। पूर्णचक्रासन और रोलिंग में यह कीतिर्मान बना है। मुरादाबादी माटी के लाल ने इस प्रयास में सफलता अर्जित करके लोगों का दिल जीत लिया। अखिल भारतीय योगा महासंघ की ओर से आयोजित विश्वस्तरीय परीक्षा में …
मुरादाबाद,अमृत विचार। मुरादाबाद के अब पारस सैनी पारसमणि हो गए। रविवार को योग में एक साथ दो विश्व कीर्तिमान बनाए। पूर्णचक्रासन और रोलिंग में यह कीतिर्मान बना है। मुरादाबादी माटी के लाल ने इस प्रयास में सफलता अर्जित करके लोगों का दिल जीत लिया।
अखिल भारतीय योगा महासंघ की ओर से आयोजित विश्वस्तरीय परीक्षा में देश के 57 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। इसमें यूपी से अकेले पारस ने हिस्सा लिया था। सुबह 9:30 बजे आनलाइन योगा शुरू हुआ। पारस ने पहले पूर्णचक्रासन का रिकार्ड अपने नाम किया। एक मुद्रा में 40 मिनट शरीर को स्थिर रखने के बाद पारस ने दूसरे यानी रोलिंग योगा में हिस्सा लिया। एक मिनट में शरीर को 32 चक्र घुमाने वाले इस बाल योग साधक ने आयोजकों को आश्चर्य में डाल दिया।
आयोजकों का कहना है कि योगा की इन परीक्षाओं में देश के एक हजार साधकों ने हिस्सा लिया था जिसमें 57 का चयन हुआ था। दुनिया के अन्य देशों के हजारों साधकों ने इसमें हिस्सा लिया। इसमें सफल आसन के विजेताओं के नाम योगा बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज होगा। यह मुरादाबाद की माटी का विश्व स्तरीय कीर्तिमान है। पारस का योगा एडवांस है। लाइनपार स्थित अपने घर से पारस ने इस आनलाइन प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया।
आपको बता कि पारस के पिता अनिल कुमार परचून की दुकान चलाते हैं। बेटे को इस क्षेत्र में सफलता के लिए वह कोई मदद तो नहीं कर पाते लेकिन इस बात को लेकर ज्यादा फिक्रमंद हैं कि बेटा योगा और खेल में कैसे मुरादाबाद का नाम रोशन करे। कहते हैं कि दो बेटे हैं। बड़ा वाला दो साल से योगाभ्यास कर रहा है। विश्व कीर्तिमान को लेकर प्रसन्न अनिल कहते हैं कि मेरी पत्नी ही इस काम में बेटे की असल मददगार और मार्गदर्शक हैं।
मां ने निभाई दोहरी जिम्मेदारी
बीटीसी, बीएड, बीपीएड और टीईटी बबिता सिंह पारस की मां और योगगुरु दोनों हैं। सुबह समय से जगाना इसके बाद तैयार कराना और तीन घंटे तक प्रशिक्षण दिलाना। इसके बाद खाना खिलाना और उसके बाद आराम कराना। कोरोना काल में यह रूटीन है मां और योगा प्रशिक्षक बबिता का। बबिता का कहना है कि बेटे के मन में दो साल पहले योग को लेकर विचार आया। टीवी और यूट्यूब पर योगासन देखने लगा। अब परिणाम सामने है। मुझे बेटे को ओलंपिक और स्पोर्ट्स के लिए तैयार करना है।
