7 और 8 अक्टूबर को लखनऊ में जुटेंगे पेट और लिवर रोग विशेषज्ञ
पेट की बीमारियों की बड़ी वजह है तनाव
लखनऊ, अमृत विचार। मौजूदा समय में पेट और लिवर के रोग की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है इसका मुख्य कारण आज कल की जीवनशैली, दिनचर्या व खान-पान है। आज के कुछ दशक पहले यह बीमारियां इतनी नहीं होती थी। आज के समय में नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीजेज (एन.ए.एफ.एल.डी.) जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और अधिक मरीजों में पायी जाती हैं जो कि दो दशक पहले इस तरह के लिवर की बीमारी उन्हीं मरीजों में देखी जाती थी जिनको या तो हेपेटाइटिस बी या सी होता था या फिर जिनको नशे की आदत होती थी। आज ऐसे मरीज बहुत पाये जाते हैं, जिन्होने नशीले पदार्थ का सेवन या तो बिल्कुल नहीं किया या अल्प मात्रा में किया। यह जानकारी गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत मेहरोत्रा ने रविवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुये दी।
इस दौरान किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) स्थित गैस्ट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट प्रो. (डॉ) सुमित रूंगटा ने बताया कि पेट और लिवर रोग के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं उनके मुकाबले चिकित्सकों की संख्या काफी कम है। ऐसे में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन 7 व 8 अक्टूबर को लखनऊ में कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में यू.पी. चैप्टर ऑफ इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोइन्टरोलॉजी के तत्वाधान द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी गोमती नगर स्थित एक निजी होटल में होगी। जिसमें देश-प्रदेश के जाने माने पेट रोग विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
ये भी पढ़ें -लखनऊ में BSP की मंडल स्तरीय बैठक संपन्न, मायावती ने दिए निर्देश
