Kanpur Assault Case: निलंबित थाना प्रभारी ने कैसे लिख ली रिपोर्ट… पुलिस की कार्य शैली पर उठ रहे सवाल
कानपुर में दवा कारोबारी और पार्षद पति के बीच मारपीट का मामला।
कानपुर में दवा कारोबारी और पार्षद पति के बीच मारपीट का मामला। निलंबित थाना प्रभारी ने रिपोर्ट कैसे लिख ली, इस पर सवाल उठ रहे है। अमान सिंह की जगह अंकित वर्मा को कमान दी जा चुकी है।
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस का एक नया कारनामा सामने आया है। भाजपा पार्षद सौम्या शुक्ला ने भी थार कार चालक व उसके साथियों पर क्रास एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन मजे की बात यह है कि इस एफआईआर में निलंबित थाना प्रभारी अमान सिंह का नाम लिखा है। यह तब है जब अंकित वर्मा को रायपुरवा का चार्ज मिले तीन दिन बीत गए हैं।
दवा कारोबारी और पार्षद पति के बीच मारपीट के मामले में लापरवाही बरतने पर पुलिस कमिश्नर ने रायपुरवा थाना प्रभारी अमान सिंह को निलंबित कर दिया था। इस मामले के दो दिन बाद भाजपा पार्षद पति समेत पांच आरोपियों ने संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी के सामने समर्पण कर दिया था। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी का गुडवर्क दिखाया था।
कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
इस मामले को लेकर लापरवाही बरतने वाली पुलिस का अंदाज अभी भी जारी है। इस मामले में शुरू से ही दवा कारोबारी और पार्षद का पक्ष पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। दोनों ही पक्ष आरोप लगाते रहे हैं कि पुलिस दूसरे पक्ष के दबाव में काम कर रही है।
एफआईआर दर्ज करने में लगाया था 22 घंटे का समय
घटना के बाद रायपुरवा क्षेत्र में जमकर हंगामा हुआ था। पुलिस के सामने दोनों पक्ष शोर शराबा कर रहे थे। एकपक्ष से सरदार अमोल दीप को गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद भी पुलिस ने लापरवाही बरती। काफी देर बाद मेडिकल के लिए भेजा गया। परिजनों ने रात में ही आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दे दी थी। इसके बाद पुलिस ने बिना नाम के एफआईआर दर्ज करने में 22 घंटे का समय लगा दिया।
भाजपा पार्षद की रिपोर्ट में गंभीर धाराएं नहीं
दवा कारोबारी अमोल दीप की ओर से दी गई नामजद तहरीर पर पुलिस ने पहले भाजपा कार चालक व उसके मित्र के खिलाफ एफआईआर 324, 354, 147, 504, 506 की धाराओं में दर्ज की थी। जिस पर सिख समाज ने सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद दिल्ली सर गंगाराम और कॉशीराम अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 326, 148, 149 पार्षद पति अंकित शुक्ला, सतेंद्र बाजपेई, अंकुर सिंह, सूरज तिवारी और अशस्वी शुक्ला के खिलाफ लगी थी। साथ ही फरार होने पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था।
आरोपियों के सरेंडर करने के बाद भाजपा पार्षद सौम्या शुक्ला की तहरीर पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 279, 354, 427, 323 और 504 के तहत थार चालक व उनके सहयोगी पर एफआईआर दर्ज कराई। जबकि पार्षद शुरू से मीडिया के सामने बयानों में कह रहीं थी कि उनकी तरफ से भी तीन घायल हैं। नियमों के अनुसार सात वर्ष या इससे ऊपर की सजा वाली धाराओं में ही गिरफ्तारी हो सकती है। अन्य मामलों में थाने से ही जमानत देने का नियम है।
-धारा 279 : लापरवाही से गाड़ी चलाना। एक हजार रुपये न्यूनतम जुर्माना, छह महीने की सजा या दोनों।
-धारा 354 : शीलभंग। न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम पांच साल की सजा।
-धारा 427 : पचास रुपये से अधिक की क्षति। किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा।
-धारा 323 : जानबूझकर कर किसी भी व्यक्ति के साथ झगड़ा करना या चोट पहुंचाना। एक वर्ष तक के कारावास की सजा व आर्थिक जुर्माना या फिर दोनों।
-धारा 504 : अपमानित करना या लोक शांतिभंग करना। एक अवधि का कारावास जिसे जिसकी अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। जुर्माना और दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं।
