Kanpur News: साबुन कपड़े चमकाएगा पर प्रदूषण नहीं फैलाएगा, HBTU के ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने किया शोध
कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने किया शोध।
कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने शोध किया। साबुन कपड़े चमकाएगा पर प्रदूषण नहीं फैलाएगा। जले हुए खाद्य तेल से पॉलीमेरिक सर्फेक्टेंट बनाया।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने ऐसा साबुन तैयार करने में कामयाबी हासिल की है, जिसका असर मैल पर तो होगा, लेकिन पानी प्रदूषित नहीं होगा। यह धीरे धीरे पानी के अंदर अपने आप ही खत्म हो जाएगा, जिससे जलीय जीवों को खतरा न के बराबर होगा। इस तकनीक को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस साबुन को जले हुए खाद्य तेलों से बनाया गया है।
एचबीटीयू के ऑयल टेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो.प्रवीण सिंह यादव के निर्देशन में स्मृति द्विवेदी ने शोध किया है। उन्होंने बेकार (उपयोग किया हुआ) खाद्य तेल से पॉलीमेरिक सर्फेक्टेंट तैयार किया। यह सर्फेक्टेंट साबुन बनाने में काम आता है।
प्रो.यादव के मुताबिक अन्य सर्फेक्टेंट पेट्रोलियम प्रोडक्ट होते हैं। यह बहुत महंगे होते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है। शोध में विशेषज्ञों ने देखा कि कुकिंग ऑयल से तैयार सर्फेक्टेंट से बना साबुन जब घुल कर पानी में जाता है तो यह घटकों में टूटता है। कुछ दिनों बाद यह खत्म हो जाता है।
पहले मिथाइल ईस्टर बनाया
विभागाध्यक्ष के मुताबिक कुकिंग ऑयल को मिथाइल ईस्टर में बनाया, फिर उसमें पॉलीमेरिक एडिशन किया। इस रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया जा चुका है।
टारगेट मेडिसिन पर काम
कपड़े धोने के साबुन के बाद विशेषज्ञों ने टारगेट मेडिसिन पर कार्य शुरू कर दिया है। यह भी बिल्कुल इसी तकनीक पर कार्य करेगा।
जले हुए तेल का उपयोग होगा कम
शोधार्थी स्मृति ने बताया कि इस तरीके से जले हुए खाद्य तेल का उपयोग कम हो सकेगा। बार बार तेल के उपयोग से यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है। कई दुकानों और ठेलों पर इसका उपयोग किया जा रहा है, यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
