बरेली: शिक्षकों का मानदेय मिला नहीं, अब बच्चों की परवरिश पर भी संकट
बरेली, अमृत विचार। कस्तूरबा स्कूलों में वार्डन, शिक्षक और अन्य कर्मचारियों का मानदेय पिछले कई महीनों ने नहीं मिला है। ऐसे में उन्हें परिवार के भरण पोषण में दिक्कत हो रही है।
वहीं स्कूलों में भी रोजमर्रा के सामान अभी तक पूरा नहीं पहुंचने से छात्राओं को रोजमर्रा का सामान नहीं मिल पा रहा है। जिले के सभी विकास खंडों में 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में 150 से अधिक वार्डन, शिक्षिका और लेखा कर्मी कार्यरत हैं। करीब 90 प्रतिशत महिला कर्मी हैं। इन्हें पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
स्कूल के कर्मियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र देकर मानदेय समय पर मुहैया कराने की गुहार लगाई है लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। इसकी वजह से उनकी बैंक लोन की किस्त भी जमा नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बैंक में जुर्माना भी देना पड़ेगा। बच्चों की स्कूल की फीस भी जमा नहीं हो पा रही है। बमुश्किल दुकानों से राशन आदि उधार लेकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। इस संबंध में बीएसए संजय सिंह ने बताया कि शासन से मिले जानकारी के मुताबिक अगले हफ्ते तक सभी कर्मियों का मानदेय आ जाएगा।
फर्म ने अभी तक नहीं दिया जरूरी सामान
जिले के 16 कस्तूरबा स्कूलों में रोजमर्रा का सामान मुहैया कराने की जिम्मेदारी फर्म को जुलाई में दी गई थी लेकिन तीन महीने की देरी के बाद अभी कुछ ही सामान स्कूलों में पहुंचा है। स्कूल की ओर से बाक्स वाला दीवान और 22 इंच की साइकिल जो एक- एक हजार रुपये में मुहैया कराई जानी थी। वह भी नहीं पहुंचाई है।
इसके अलावा फिनायल, जूता, अंडर गारमेंट्स, चप्प्ल, रबड़ बैंड आद कई जरूरी सामनों की आपूर्ति अभी तक नहीं हो पाई है। जबकि यह सभी रोजमर्रा के सामान बालिकाओं के लिए बेहद जरूरी हैं। कई स्कूलों में तो स्थिति यह है कि बालिकाओं को कुर्सी और मेज को जोड़ कर रात में सोने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इस बार 9 से 12 तक की कक्षाएं भी कई कस्तूरबा स्कूलों में शुरू करा दी गईं हैं। जिले की सभी कस्तूरबा स्कूलों में 16 सौ बालिकाएं पंजीकृत हैं, जो यहां से शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
राजस्व की क्षति पर अमृत विचार ने लगाया ब्रेक
कस्तूरबा स्कूलों में राशन और रोजमर्रा के लिए दो फर्मों को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने साठगांठ कर बाजार रेट से अधिक पर भी सामान मुहैया कराने के लिए जानबूझ कर इन फर्मों को ठेका दे दिया है। अमृत विचार में फर्म और अधिकारी के साठगांठ की पोल खुलने के बाद से सीडीओ जगप्रवेश ने इनके खेल पर सख्ती कर दी है।
बुधवार को सीडीओ ने बताया कि अमृत विचार में खबर प्रकाशित होने से ही यह धांधलेबाजी उजागर हुई है। करीब 20 लाख की सरकारी राजस्व की क्षति होने से बच गई है। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ से बाजार के दाम मांगे गए हैं और बाजार दर पर ही फर्म को धनराशि मुहैया कराई जाएगी।
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