इलाहाबाद हाईकोर्ट: पशु आहार घोषित नमकीन की दोबारा पैकेजिंग मामले में सरकार पर लगाया जुर्माना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नामी कंपनियों की पशु आहार घोषित नमकीन की दोबारा पैकिंग करके स्थानीय बाजार में खपाने वालों के बारे में बरेली प्रशासन से पूरी जानकारी मांगी थी, लेकिन 3 साल में भी प्रशासन हाईकोर्ट को पूरी जानकारी नहीं दे सका। कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन की इस लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए मामले में सरकार पर 50000 का जुर्माना लगाया है।
मालूम हो कि वर्ष 2020 में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। वर्तमान में यह मामला मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ के समक्ष सुना गया। दरअसल हल्दीराम, बीकानेरी, बीकाजी, पारले, बालाजी, क्रेक्स जैसी नामी कंपनियों की रिजेक्ट नमकीन को कुछ व्यापारी मिक्स नमकीन बनाकर बाजार में खपा रहे थे।
दीपावली के समय छापेमारी के दौरान आधा दर्जन कारखानों में यह मिलावट पकड़ी गई। ब्रह्मपुरा, बरेली स्थित कारखाने पर छापेमारी में करीब ढाई क्विंटल से ज्यादा घटिया नमकीन नष्ट कराने का दावा किया गया था। गौरतलब है कि नामी कंपनियां जरा सी खामियां मिलने पर नमकीन को रिजेक्ट करके पशु आहार के लिए नीलाम करती हैं।
मिलावटखोर इस नमकीन को नीलामी के दौरान सस्ते में खरीदकर खुला या दोबारा पैक करके बाजार में बेच देते हैं। त्योहारों के समय में बरेली में प्रतिदिन इस तरह के नमकीन की लगभग 100 टन की खपत होने का अनुमान है। अतः पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जन स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए अफसरों से जानकारी मांगी थी।
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