कासगंज: पटियाली के न्यायिक तहसीलदार पर अलीगढ़ में हुई एफआईआर, जानें पूरा मामला

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गभाना तहसील के गांव नगला पदम में जमीन में हेरा-फेरी का है आरोप

कासगंज, अमृत विचार। कासगंज जिले के पटियाली तहसील में तैनात न्यायिक तहसीलदार पर एफआईआर दर्ज हुई है। उन पर जमीन में हेरा-फेरी का आरोप है। डीएम के आदेश पर अलीगढ़ में हुई कार्यवाही की खबर कासगंज में पहुंचते ही खलबली मच गई और प्रशासनिक महकमे में यह खबर चर्चा का विषय बनी। वहीं स्थानीय स्तर पर प्रशासन को कोई पत्र नहीं मिला है। इसलिए अधिकारियों का कहना है कि कार्यवाही अलीगढ़ से ही हो रही है।

पटियाली के तहसीलदार न्यायिक संदीप कुमार मूल रूप से जिला बुलंदशहर के सारंग के रहने वाले है। वह पूर्व में गभाना में नायब तहसीलदार रह चुके है। क्षेत्र के गांव नगला पदम में गुलवीर सिंह के नाम 64 बीघा जमीन थी। उनके निधन के बाद रिश्तेदार खुर्जा क्षेत्र के गांव अटिरना निवासी रवेंद्र राघव ने वसीयत के जरिए जमीन पर अपना हक जताया। रवेंद्र राघव और गुलवीर सिंह के बीच काफी दिनों तक विवाद चलता रहा। विवाद के खतौनी में दोनों पक्षों के नाम दर्ज हो गए। फिर रवेंद्र राघव का भी निधन हो गया। उनकी पत्नी रीना देवी, पुत्री तनु और पुत्र शिवम राघव के नाम खतौनी में दर्ज हो गए। 

वर्ष 2022 में इन लोगों ने यह जमीन बुलंदशहर के गांव सलेमपुर निवासी ओमप्रकाश, नोएडा निवासी पवन कुमार और दिल्ली के सकरपुर निवासी सुशील कुमार को डेढ़ करोड़ रुपये में बेच दी। इसमें सुशील कुमार गाभाना तहसील के तत्कालीन नायब तहसीलदार संदीप कुमार के करीबी है। इसकी शिकायत नगला पदम निवासी गुलवीर के बेटे राकेश ने सीएम पोर्टल पर की। मामले की जांच हुई। लंबी जांच के बाद शनिवार को अलीगढ़ के डीएम के आदेश पर पटियाली के न्यायिक तहसीलदार संदीप कुमार को पूरे मामले में फर्जीवाड़े का दोषी मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई है। न्यायिक तहसीलदार के पिता अनिल प्रताप भी इस मामले में आरोपी है।

प्रकरण संज्ञान में आया है। स्थानीय स्तर पर कार्यवाही फिलहाल नहीं बन रही है। विवेचना अलीगढ़ से ही होनी है। यदि शासन स्तर से कोई निर्देश मिला है तो स्थानीय स्तर पर पालन होगा। - डा. वैभव शर्मा, एडीएम

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