हल्द्वानी: 10 साल पहले मदरसे के सच को बचकानी बात कह कर टाल गई थी पुलिस
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। वीरभट्टी में जिस मदरसे पर का सच अब सामने आया है, उसका खुलासा 10 साल पहले वहीं से भाग कर आए एक बच्चे ने कर दिया था, लेकिन तब पुलिस ने यकीन नहीं किया और बच्चे के आरोप को बचकानी बात कर टाल दिया गया।
अब पुलिस और प्रशासन कानून का हवाला देकर बच्चों को मीडिया से दूर रख रहा है। ये बात वर्ष 2012 के आस-पास की है। उस वक्त हल्द्वानी कोतवाली में इंदर सिंह राणा बतौर एसएसआई तैनात थे। हालांकि अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। तब कोतवाली गेट के ठीक सामने उनकी कुर्सी लगती थी।
उस रोज अचानक एक बच्चा रोता हुआ उनके पास पहुंचा। उस बच्चे ने बताया कि वह वीरभट्टी स्थित मदरसे में पढ़ता है, लेकिन पढ़ाई के बजाय उसे लाठी, तलवार और चाकू चलाना सिखाया जाता है। जब वह हथियार चलाने से इंकार करता है तो उसे पीटा जाता है।
बच्चा अभी उन्हें बातें बता ही रहा था कि तभी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग एसएसआई के पास पहुंचे। उन्होंने खुद को मदरसे का होना बताया और बच्चे की दिमागी हालत ठीक न होने की बात कही। साथ यह भी कहाकि बच्चा पढ़ने में लापरवाही करता है और इसी वजह से वह मदरसे से भागा।
अब उसे दोबारा मदरसा न जाना पड़े, इसलिए उल्टी सीधी बातें कर रहा है। पुलिस ने भी उक्त लोगों की बात पर भरोसा कर लिया और बच्चे के आरोपों को बचकानी बात समझ कर मामला टाल दिया। बच्चा उक्त लोगों को सुपुर्द कर दिया गया और आरोपों को रफा-दफा कर दिया।
बचपन में ही लगा टीबी जैसा खतरनाक रोग
हल्द्वानी : मदरसा अब कानूनी धाराओं से जकड़ चुका है। बच्चों का बयान मदरसा संचालकों के खिलाफ अहम सुबूत है, लेकिन उससे पहले मदरसे का सच देखने के लिए वहां पढ़ने वाले बच्चों को देख लेना ही काफी है। वो शिक्षा जो सफाई का संदेश भी देती है, लेकिन इसके इतर छात्रों का बचपन टीवी जैसे जानलेवा रोग से जकड़ गया। बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी हो रहा है। हो सकता है कि जिन हालातों में बच्चे रहते थे वो बीमारियों से जकड़े मिलें।
