प्रयागराज : एशियन गेम्स विजेता अजय का हुआ स्वागत, ओलंपिक में मेडल जीतने का किया एलान
प्रयागराज, अमृत विचार। एशियन गेम्स में भारत का झंडा लहराने वाले अजय कुमार सरोज सोमवार को प्रयागराज पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। प्रयागराज जंक्शन पर स्वागत करते हुए खिलाड़ियों ने उन्हें कंधे पर उठाकर भारत माता की जय के नारे लगाये । स्टेशन के बाहर स्टेडियम में भी जोरदार स्वागत किया गया।
चीन में आयोजित एशियन गेम्स में 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर भारत का तिरंगा लहराने वाले अजय कुमार सरोज सोमवार को संगमनगरी प्रयागराज पहुंचे। जहां पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। खिलाड़ियों और उनके चाहने वालो ने रेलवे स्टेशन पर फूल मालाओं से स्वागत करते हुए उन्हे कंधे पर उठा लिया। इसके बाद मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में अजय का स्वागत किया गया। विजेता अजय सरोज ने कहा कि मंजिल पाने के लिए मेहनत से ज्यादा दिमाग मे पागलपंती का जूनून होना जरूरी है। किसी लक्ष्य के प्रति जुनून होने पर ही खिलाड़ी अपने मुकाम तक पहुंचाता है।
अजय सरोज ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के बाद यह सफलता पाई है। इसमें उनके कोच के साथ परिवार और भाई का जो योगदान है उसे वह कभी भुला नहीं सकते है। परिवार ने मुसीबत में होते हुए भी उनको आगे बढ़ाने का कार्य किया है। एशियन गेम्स का पदक वह अपने परिवार को माता-पिता और परिवार को समर्पित कर रहे हैं। वह एशियाड के लिए 2009 से तैयारी कर रहे हैं। 15 वर्ष के बाद उन्हें सफलता मिली है। ओलंपिक में रैंकिंग के आधार पर उनका चयन हो जाना चाहिए।
बता दें कि 1500 मीटर की दौड़ में अजय का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। अजय ने अपनी दौड़ 3:38.94 के समय में पूरी की। उन्होने बताया कि पिता धर्मराज प्लम्बरिंग का काम करते हैं। उनके पांचों बच्चे धावक हैं। पिता की इच्छा पर अजय के भाई अजीत ने सबसे पहले दौड़ना शुरू किया। पिता चाहते थे कि उनका बेटा सेना में भर्ती हो। अजीत ने जब एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर तक की स्पर्धा में मेडल जीता तो पिता की ख्वाहिश हुई कि बेटा देश के लिए पदक जीते।
पिता के लिए दोनों छोटे बच्चों ने मेहनत की। भाइयों को देखकर बहनों में भी धावक बनने की इच्छा जागी। पिता ने बच्चों को दौड़ने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने अपनी मेहनत जारी रखी और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अजय के बड़े भाई अजीत की खेल कोटे से रेलवे में सीटीआई है। उन्होने अजय की मदद की और उनका हौसला बढ़ाया, यही कारण रहा है कि अजय धीरे-धीरे अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ने लगा।
ये भी पढ़ें -लखनऊ : मिजोरम छोड़ सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ेगी बहुजन समाज पार्टी
