Banda: 572 लाख ठिकाने लगाने को रोड का नवीनीकरण करवा रहा PWD, छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने की मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत

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Edited By Amrit Vichar
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बांदा में 572 लाख ठिकाने लगाने को चिकनी सपाट रोड का नवीनीकरण करवा रहा पीडब्ल्यूडी।

बांदा में 572 लाख ठिकाने लगाने को चिकनी सपाट रोड का नवीनीकरण पीडब्ल्यूडी करवा रहा है। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत की। निर्माण कार्य रुकवाकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।

बांदा, अमृत विचार। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता राजाराम मथुरिया ने जनपद मुख्यालय के आलाधिकारियों की मिलीभगत से एक बार फिर सरकारी धन को एक बार फिर से ठिकाने लगाने का इंतजाम कर लिया है।

इस बार पूरी तरह से दुरुस्त मार्ग पर नवीनीकरण के नाम पर 572 लाख रुपये का बंदर बांट किया जा रहा है। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत करते हुए कार्य को रुकवाने के साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।  

छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे शिकायती पत्र में बताया है कि प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग गाइड लाइन से हटकर नवीनीकरण का कार्य करवा रहा है, ताकि लाखों रुपयों का बंदरबांट किया जा सके। 18 किलोमीटर लंबाई के बबेरू-तिंदवारी सुमेरपुर राज मार्ग संख्या-134 नवीनीकरण के नाम पर 572 लाख को ठिकाने लगाया जा रहा है, जबकि यह मार्ग कहीं से भी क्षतिग्रस्त नहीं है।

साथ ही सड़क की सड़क की सतह भी एकदम चिकनी है, जिसकी वजह से डामरीकरण का कार्य भी स्थाई नहीं हो सकता। इसके विपरीत विभाग जनपद की तमाम ऐसी क्षतिग्रस्त सड़कों को हमेशा से नजरंदाज करता आया है, जिनमें आवागमन को लेकर आम जनमानस को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यदि इस सरकारी धनराशि से उन क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण कराया जाए तो सरकारी धन का सदुपयोग हो सकता है साथ ही इस भ्रष्टाचार पर भी लगाम लग सकती है।

छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से इस मार्ग में कराए जा रहे नवीनीकरण के कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके। साथ ही उन्होंने मांग की है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के लिये दोषी अधिशाषी अभियंता व अन्य अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्यवाही कार्यवाही भी की जाए, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृति न हो सके।

 

 

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