बरेली: सड़क में पानी और सीवर की लाइन का GIS मैपिंग से चलेगा पता
नगर निगम तैयार करा रहा है जीआईएस मैप
बरेली, अमृत विचार। शहर में किस सड़क पर कहां से सीवर और पानी की पाइप लाइन जा रही है। इसका पता नहीं होने पर पाइप लाइन में खराबी आने पर सड़क को तोड़ना पड़ता है। कौन सी पाइप लाइन कहां पड़ी है इसकी सही जानकारी के लिए अब हर वार्ड का जीआईएस सर्वे कराया जा रहा है। इससे श्रम के साथ राजस्व की भी बचत होगी।
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नगर निगम के पास सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइन का विस्तृत नक्शा नहीं है। इससे पाइप लाइन की सही स्थिति का आंकलन नहीं हो पाता है। नगर निगम की सीमा में अब हर वार्ड का नक्शा तैयार कराया जाएगा। इसमें वार्ड की बाउंड्री भी शामिल होगी। इससे दो वार्ड के बीच की स्थिति का भी आंकलन हो सकेगा।
इस नक्शे में नगर क्षेत्र में वार्ड में बिछी सड़क की लंबाई चौड़ाई, सीवर लाइन की लंबाई और लाइन का व्यास ग्रेडिएंट भी शामिल किया जाएगा। इसमें मैनहोल, चैम्बरों की संख्या, पेयजल पाइप लाइन की लंबाई एवं व्यास, स्ट्रीट लाइट, पोल की संख्या, सभी नालों की लंबाई और चौड़ाई और गहराई व नाले की ढलान की स्थिति, क्षेत्र में प्रसिद्ध लैंडमार्क का चिह्नीकरण की जानकारी सहित जीआईएस मैपिंग कराई जाएगी।
इससे शहर की मूलभूत सुविधाओं और मूलभूत ढांचे के नवीनीकरण में काफी आसानी होगी। बारिश के बाद होने वाले जलभराव की समस्या , ग्रेविटी फ्लो से सीवर लाइन की सफाई में आसानी होगी। मैपिंग के बाद सीवर या पेयजल पाइप लाइन बिछाने का आसानी से पता चल सकेगा।
शहर में चिह्नित कर सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइन बिछाने का कार्य कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त सभी नालों की लंबाई, चौड़ाई, गहराई और नाले की ढलान की स्थिति भी मिल जाएगी---निधि गुप्ता वत्स,नगर आयुक्त।
जीआईएस मैपिंग का लाभ घनी आबादी वाले क्षेत्र में मिल सकेगा। इससे नगर की पूरी जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी, जिससे नगर निगम के कार्यों में सुधार और जनता को बेहतर सुविधा मिल सकेगी---डाॅ. उमेश गौतम, मेयर।
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