संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत: सैयद अकबरूद्दीन

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने गुरुवार को कहा कि संरा में सुधार की जरूरत है ताकि इस मंच पर सिर्फ शांति और सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि हर उस मुद्दे को उठाया जा सके, जो प्रासंगिक है। उन्होंने ‘इज द वर्ल्ड बेस्ट ऑर वर्स टुडे’ विषय …

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने गुरुवार को कहा कि संरा में सुधार की जरूरत है ताकि इस मंच पर सिर्फ शांति और सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि हर उस मुद्दे को उठाया जा सके, जो प्रासंगिक है। उन्होंने ‘इज द वर्ल्ड बेस्ट ऑर वर्स टुडे’ विषय पर आज आयोजित वेबीनार को संबोधित करते हुए कहा ,“ जिस संकट से अभी हम गुजर रहे हैं, वैसा संकट अभी तक हमने अपनी जिंदगी में नहीं देखा है।

उन्होंने कहा यह संकट स्वास्थ्य, पर्यावरण, आर्थिक पहलू, साइबर अपराध और भू राजनैतिक पहलू से संबंधित है। यह संकट शांतिकाल का संकट है, लेकिन हमने लाखों व्यक्तियों को खो दिया, जो किसी बड़े संघर्ष या विवाद में होने वाली माैत की संख्या के करीब है। संयुक्त राष्ट्र में हमेशा शांति और सुरक्षा की बात होती रहती है जबकि इस मंच पर हर चुनौती के बारे में बात होनी चाहिए चाहिए वह स्वास्थ्य संबंधी हो, पर्यावरण संबंधी हो या आर्थिक पहलू आदि से जुड़ा हो।”

सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि प्रत्येक बदलाव संघर्ष के बाद आता है। संयुक्त राष्ट्र का जब गठन भी संघर्ष के बाद हुआ। इतिहास उठाकर देखें तो पता चलता है कि एक भी बदलाव शांति काल में नहीं हुआ है। यह ठीक है कि सभी मुद्दों का अपना महत्व है लेकिन हममें से किसी ने भी यह गौर नहीं किया कि कोरोना महामारी शुुरु होने के शुरुआती तीन महीनों के दौरान सुरक्षा परिषद ने क्या किया।

सुरक्षा परिषद तीन माह तक इतने गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज करती रही, क्योंकि यह शांति और सुरक्षा से जुड़ा मसला नहीं था जबकि इसके कारण लाखों लोगों की मौत हुई। सुरक्षा परिषद ने आखिरकार बाद में इस पर चर्चा की । इस चर्चा के तीन माह के बाद भी धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखा।

सैयद अकबरुद्दीन ने कहा ,“ यह सही यह है कि संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद् बैठक कर सकती है, मिल सकती है और चर्चा कर सकती है लेकिन दुनिया में जो बाहर हो रहा है, वह बहुत अलग है और इसी कारण लोग उसे अब गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र अगर शांति और सुरक्षा के ढांचे में बदलाव नहीं करता है तो उसने जो कुछ भी अच्छा किया है, वो सब इस स्थिरता के कारण गौण हो जायेगा।

संयुक्त राष्ट्र में बदलाव के निवेश करना जरूरी है, नहीं तो देश गरीब और कमजोर हो जायेंगे। भारत जैसे देश के लिए यह अति महत्वपूर्ण है, जिसे अंतराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।” इस वेबीनार को संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून, संरा तथा यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी भास्वती मुखर्जी और संरा महासचिव के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ विजय के नांबियार ने भी संबोधित किया।

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