बरेली: क्या करे स्वास्थ्य विभाग... मौत का कलंक अज्ञात बुखार के माथे पर, डेंगू का खाता बेदाग
फोटो- 300 बेड अस्पताल में बनाया गया डेंगू वार्ड।
बरेली, अमृत विचार। बिना चेहरे की मौत के आगे जिले में बेबसी भरे हालात, गांव-गांव चल रहा है डेंगू का इलाज फिर भी स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में हालात काबू में
डेंगू का प्रकोप शुरू होने के बाद जिले में अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में उसी मौत का कारण डेंगू को माना जाता है, जब एलाइजा टेस्ट में पुष्टि हुई हो। यही वजह है कि एक तरफ जिले में डेंगू जैसे लक्षणों वाले हजारों मरीज हैं तो दूसरी तरफ जिला अस्पताल में लगी एकमात्र मशीन से स्वास्थ्य विभाग एक दिन में सिर्फ 25-30 एलाइजा टेस्ट कर पा रहा है।
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इस तरह डेंगू नियंत्रण में दिख रहा है और हर रोज होने वाली मौतें अज्ञात बुखार के लावारिस खाते में दर्ज हो रही हैं। हालांकि निजी अस्पतालों में मरीजों का मेला लगा हुआ है जहां उनका डेंगू का इलाज चल रहा है। इधर, स्वास्थ्य विभाग मरीजों का इतना बोझ संभालने की स्थिति में ही नहीं है। लिहाजा डेंगू के इलाज के उसके कागजी इंतजाम भी जिंदगी के लिए जूझ रहे लोगों को कुछ ज्यादा भरोसा बंधा पाने की स्थिति में नहीं हैं।
50 बेड के लिहाज से स्टाफ भी नहीं, न कोई निर्देश जारी किए
अमृत विचार : डेंगू की पुष्टि के लिए सीमित संख्या में ही एलाइजा टेस्ट हो रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित किए गए 40 बेड कम पड़ने के बाद अब डीएम के निर्देश पर तीन सौ बेड अस्पताल में 50 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है मगर इसके लिए न स्टाफ का इंतजाम है न डॉक्टर का। अस्पताल में तैनात एकमात्र फिजिशियन काफी दिनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, फिर भी सीएमओ का कहना है कि तीन सौ बेड अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ ही डेंगू मरीजों का इलाज करेंगे।
डेढ़ महीने पहले जिले में डेंगू का प्रकोप शुरू होने के बाद जिला अस्पताल में डेंगू-मलेरिया वार्ड बनाया गया था। कुछ दिन बाद डेंगू का हमला तेज हुआ तो वार्ड में मरीजों के लिए बेड बढ़ा दिए गए। अब जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए आरक्षित 40 बेड कम पड़ रहे हैं।
सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम रविंद्र कुमार ने सभी बेड फुल पाए तो सीएमओ को तीन सौ बेड अस्पताल में भी 50 बेड का डेंगू वार्ड बनाने के निर्देश दिए। डीएम के निर्देश पर यहां आननफानन वार्ड तो बना दिया गया लेकिन यह तय ही नहीं है कि यहां डेंगू के मरीज अगर भर्ती हुए तो उनका इलाज और देखरेख कौन करेगा।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि स्टाफ की कमी है, लिहाजा तीन सौ बेड अस्पताल में जो डॉक्टर और स्टाफ ओपीडी देख रहे हैं, डेंगू मरीजों का इलाज भी वही करेंगे। सीएमओ ने यह भी कहा कि स्थिति अभी काबू में है।
मरीज बढ़ने पर ही तीन सौ बेड अस्पताल में मरीज भर्ती किए जाएंगे। दिलचस्प यह है कि तीन सौ बेड अस्पताल में पैरा मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की तैनाती तो है, फिलहाल फिजिशियन एक भी नहीं है। यहां तैनात एकमात्र फिजिशियन काफी समय से ड्यूटी पर नहीं है। स्टाफ को भी अभी डेंगू वार्ड में ड्यूटी के बारे में कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
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