UP: वारंट पूछा तो दरोगा साहब को आई दबिश की याद… वादी से रुपये मांगने पर निलंबित हुए थे पूर्व विवेचक, जानें- मामला
कानपुर में वारंट पूछने पर दरोगा को दबिश की याद आ गई।
कानपुर में वारंट पूछने पर दरोगा को दबिश की याद आ गई। वादी से रुपये मांगने पर पूर्व विवेचक निलंबित हुए थे। दूसरे विवेचक ने भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया।
कानपुर, अमृत विचार। फर्जी दस्तावेज पर रुपये लेकर नौकरी दिलाने और करने वालों के खिलाफ जांच एक माह से ठंडी पड़ी है। इस मामले में पूर्व विवेचक को निलंबित कर दिया गया था। गुरुवार को दूसरे विवेचक को एसीपी नौबस्ता ने कोर्ट से आरोपियों का गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) लेने के निर्देश दिए तब विवेचक को दबिश देने की याद आई। इस पर विवेचक को फटकार लगाते हुए एसीपी ने तीन दिन का समय दिया है।
बर्रा संघर्ष नगर निवासी संदीप सिंह ने बताया कि ममेरे बहनोई ग्वालियर के चंद्रनगर निवासी राजीव सिंह उनकी पत्नी बबिता साथी रामशरण समेत कई लोगों के खिलाफ अगस्त 2022 में पत्नी रूपा की नौकरी का झांसा देकर 34 लाख रुपये हड़पकर फर्जी चयनपत्र देने की रिपोर्ट बर्रा थाने में दर्ज कराई थी।
आरोप है कि तत्कालीन विवेचक ने आरोपियों की गिरफ्तारी आदि में खर्च के नाम पर तीन लाख रुपये उनसे लिए थे। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा, लेकिन मुख्य आरोपी दंपति समेत अन्य आरोपी व फर्जी शिक्षक बन नौकरी करने वाले दो और आरोपी अब तक फरार हैं। संदीप और तत्कालीन विवेचक एसआई राजेश कुमार के बीच आडियो रिकार्डिंग वायरल हुई थी। जिसमें विवेचक रुपयों की मांग कर रहे थे।
18 सितंबर को एसआई राजेश कुमार को निलंबित कर जांच विवेचना बृजेश कुमार को दी गई, लेकिन उन्होंने तब से जांच शुरू नहीं की। एक माह से एसीपी आरोपियों का एनबीडब्ल्यू लेने की बात कह रहे थे, लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया। गुरुवार को एसीपी ने फिर एनबीडब्ल्यू लेने को कहा तो विवेचक ने कहा कि पहले दो बार दबिश देनी होगी। दबिश व पर्चे काटने के बाद आवेदन कर पाएंगे। इस पर फटकार लगाते हुए एसीपी ने तीन दिन का समय दिया है।
