रामपुर: 17 माह के बाद फिर सीतापुर जेल पहुंचे आजम खां
27 माह पहले ही जमानत पर छूटकर आए थे सपा नेता, सुबह 9.20 पर पहुंचे सीतापुर जेल
रामपुर, अमृत विचार। 17 माह के बाद सपा नेता आजम खां रविवार को फिर से सीतापुर जेल पहुंच गए। 27 माह पहले ही आजम खां जमानत पर रिहा होकर आए थे। हालांकि अब आजम खां कैदी बनाकर वहां फिर पहुंच गए हैं। पहले वह बंदी के रूप में सीतापुर जेल में बंद थे।
बताते चलें कि सूबे में आई भाजपा सरकार ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ घेराबंदी करते हुए 2019 में काफी मुकदमे दर्ज कराए थे, जोकि धीरे-धीरे करके 100 के पार हो गए थे। इतना ही नहीं अब्दुल्ला आजम और तजीन फात्मा पर भी काफी मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। कोर्ट में पेश नहीं होने के कारण कोर्ट ने उनके खिलाफ 82 की कार्रवाई कर दी थी।
जिसके बाद आजम खां ने बेटे अब्दुल्ला आजम खां और पत्नी डा. तजीन फात्मा के साथ 26 फरवरी 2020 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। एक रात तीनों को रामपुर जिला कारागार में रखने के बाद तीनों को 27 फरवरी 2020 को सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। विधानसभा चुनाव से पहले अब्दुल्ला आजम फरवरी 2022 में सीतापुर जेल से बाहर आए थे। हालांकि करीब 27 माह के बाद सपा नेता आजम खां 21 मई 2022 को रामपुर शहर से चुनाव जीतने के बाद जमानत पर जेल से रिहा हुए थे।
उसके बाद उन्होंने खुले में करीब 17 माह हवा ली थी। 18 अक्टूबर को अब्दुल्ला आजम के दो जन्मप्रमाण पत्र मामले में कोर्ट ने तीनों को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद रामपुर जिला कारागार में शिफ्ट कर दिया गया था। रविवार को फिर से आजम खां को सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि इस बार वह एक बंदी के रूप में नहीं बल्कि कैदी के रूप में पहुंचे हैं।
चार मामलों में आजम खां को हुई सजा
17 माह आजम खां जेल से बाहर रहे, लेकिन उनके यह दिन भी परेशानी में बीते। कभी जौहर विवि में आकर ईडी ने परेशान किया, तो कभी इनकम टैक्स ने उनके घर पर छापा मारकर रिकार्ड खंगाले। कई बार बीमार होने के कारण दिल्ली में इलाज के लिए जाना पड़ा था। करीब 15 साल पुराने छजलैट मामले में उनको और बेटे को दो साल की सजा हो गई थी हालांकि जमानत मिल गई थी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करने के दो मामलों में उनको सजा सुनाई गई। जिसमें उनको जमानत मिल गई थी, लेकिन अब जन्म प्रमाण पत्र मामले में उनको सजा हो गई।
आजम बोले- तड़के जेल से शिफ्ट करने क्या मतलब!
जिला कारागार से आजम खां को सीतापुर जेल ले जाया गया। इस दौरान कारागार के गेट से बाहर आते ही आजम खां ने कहा कि उनका एनकाउंटर भी कराया जा सकता है। तड़के जेल से शिफ्ट करने का क्या मतलब है। लंबे समय से उनके परिवार का उत्पीड़न हो रहा है।
हमेशा अपने बयानों को लेकर आजम खां चचार्ओं में रहते हैं। जहां भी उनको बोलने का मौका मिलता है। वह कोई कमी नहीं छोड़ते। 18 अक्टूबर को सजा होने के बाद से आजम और अब्दुल्ला जिला कारागार में बंद थे। सुरक्षा के लिहाज से उनको और उनके बेटे को सीतापुर और हरदोई शिफ्ट करने के लिए ले जाया गया। जब आजम खां जिला कारागार के गेट से बाहर आए, तो वह काफी देर तक सड़क के चक्कर काटते रहे।
उसके बाद मीडिया को देखकर बोले कि उनका एनकाउंटर भी कराया जा सकता है, नहीं तो इतनी सुबह यहां से ले जाने का क्या मतलब है। बोले- उनके परिवार का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। कहा, हम बीमार हैं हमारी हड्डी तुड़वाना है क्या? यह सुनते ही अधिकारी सकते में आ गए। उसके बाद सीओ रवि खोकर ने उनसे बात की। उसके बाद वह पिछली सीट पर बैठकर चले गए, फिर कहीं जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली।
आदेश मिलते ही जिला कारागार हो गया छावनी में तब्दील
आजम खां और अब्दुल्ला को सीतापुर और हरदोई की जेल में शिफ्ट करने का शनिवार को फरमान मिलते ही जिले के अधिकारी सक्रिय हो गए थे। सभी पुलिसकर्मी तैयारियों में जुट गए थे। कई थानों की फोर्स को जिला कारागार के आसपास तैनात कर दिया गया था। इसके अलावा देर रात को ही तीन सीओ भी जिला कारागार पहुंच गए। सारी तैयारियां पूरी हो जाने के बाद सभी कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। इस दौरान हर मिनट पर अधिकारी वायरलेस से जानकारी लेते रहे। रामपुर की सीमा से निकलने के बाद राहत की सांस ली।
आधा शहर सोता रहा, आजम और अब्दुल्ला हो गए रवाना
आधा शहर सोता रह गया आजम खां और अब्दुल्ला आजम दूसरी जेल के लिए रवाना हो गए। सुबह को दिन निकलने के बाद जिसको भी पता चला तो वह भी सकते में आ गए। समर्थक भी मायूस हो गए।
अकेली रह गईं तजीन, बेटे और पति भी हो गए अलग
डा. तजीन फात्मा जहां बेटे और पति से दूर हो गईं, तो वहीं अब्दुल्ला आजम भी माता पिता से दूर हो गए। जबकि आजम खां बेटे और पत्नी से दूर हो गए। आजम और तजीन काफी दिनों बीमार चल रहे हैं।
आजम खां को अपने छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम का दो जन्मप्रमाण पत्र बनवाना उनके व उनके परिवार के लिए घातक होता चला गया। जिसका नतीजा यह निकला कि 2019 में इस मामले में तीनों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। उसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में चली। काफी सालों तक चली कानूनी लड़ाई में आजम खां और उनका परिवार हार गया। 18 अक्टूबर को एमपी-एमएलए कोर्ट ने तीनों को सात-सात साल की सजा सुनाई।
यह सुनकर तीनों के चेहरे मायूस हो गए, हालांकि इन तीनों को पहले ही आगाज हो चुका था कि रामपुर जेल में रखकर किसी अन्य जेल में रखा जाएगा, लेकिन शनिवार रात को आए आदेश ने उन्हें हिलाकर रख दिया। अब तीनों अलग-अलग हो गए हैं। आजम खां सीतापुर जेल चले गए। वह अपनी बेटे और पत्नी से दूर हो गए, तो बुढ़ापे का सहारा बने अब्दुल्ला आजम खां अपने पिता और माता दोनों से अलग हो गए, जबकि तजीन फात्मा पति और बेटे दोनों से दूर हो गईं। रविवार सुबह जिला कारागार में तीनों की आखिरी मुलाकात हुई थी।
पिता और भाई से मिलकर भावुक हुए अदीब
आजम खां को सीतापुर और अब्दुल्ला आजम खां को हरदोई में शिफ्ट करने की जैसे ही जानकारी बड़े बेटे अदीब आजम को मिली, तो वह पिता और भाई से मिलने के लिए सामान लेकर जिला कारागार पहुंच गया। उसके बाद दोनों से मुलाकात करते हुए अदीब भावुक हो उठे। कुछ समय तक मुलाकात होने के बाद दोनों रवाना हो गए। हालांकि सूत्रों की मानें तो पिता पुत्र को बताया ही नहीं गया था कि उनको कहां ले जाया जा रहा है। सोते से पुलिस ने उठाया। उसके बाद पुलिस उनको लेकर रवाना हो गई।
सीतापुर जेल में रहे थे अब्दुल्ला आजम
सीतापुर जेल से सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम का पुराना नाता रहा है। वह यहां करीब दो साल तक सीतापुर जेल में रह चुके हैं। सपा नेता आजम खां ने अपने परिवार समेत 26 फरवरी 2020 को गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद कोर्ट में सरेंडर किया था। उनके साथ उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां और पत्नी डा.तजीन फात्मा भी रही थीं। हालांकि इस बार अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल में शिफ्ट किए गए हैं।
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