बरेली: जनता पर मुंह खोलने के लिए भी टैक्स भरने की पाबंदी, अफसर गोलमाल से बाज नहीं आ रहे, जानिए मामला
नगर निगम के टैक्स विभाग में फिर उजागर हुए टैक्स में हेराफेरी के मामले, नगर आयुक्त ने दिया जांच का आदेश
बरेली, अमृत विचार। शहर में टूटी सड़कों और गंदगी की समस्याओं पर लोगों का मुंह बंद करने के लिए एक तरफ नगर निगम में उनसे टैक्स की अदायगी का ब्योरा पूछा जा रहा है तो दूसरी तरफ टैक्स विभाग में ही एक के बाद एक घपलों और गलत बिल जारी करने के मामले सामने आने के बाद अफसरों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। अब नगर निगम के जोन- 4 में टैक्स में घपले के दो मामले फिर सामने आए हैं। एक प्रकरण टैक्स की आईडी ही खत्म कर दिए जाने का है तो दूसरे बिल में लाखों रुपये कम कर दिए गए। नगर आयुक्त ने जांच का आदेश दिया है।
नगर निगम के जोन- 4 में आने वाले जनकपुरी इलाके में एक दुकान की टैक्स आईडी 080791 है जिसकी छत पर टॉवर लगा है। अप्रैल 2018 में इसका 4 लाख 78 हजार 806 रुपये का बिल जारी हुआ था जो 2021 तक 8 लाख 91 हजार 12 रुपये हो गया।
मार्च 2023 तक इसमें से 5 लाख 22 हजार 804 रुपये की धनराशि जमा कर दी गई। इसके बाद हैरतअंगेज ढंग से 26 मार्च 2023 को राजस्व निरीक्षक के मुआयने के बाद सीटीओ के आदेश पर इस बिल में 4 लाख 35 हजार 15 रुपये कम कर दिए गये। अब इस संपत्ति का इस साल का पूरा टैक्स जमा हो चुका है।
एक और घपला जोन- 4 के ही एकता नगर में किया गया। डबल स्टोरी कॉलोनी में आईडी नंबर 054781 पर दो मकानों का टैक्स 2018 में आपस में मर्ज कर एक आईडी को ही खत्म कर दिया गया। दिलचस्प यह है कि दो मकानों की एक आईडी बनाने पर टैक्स बढ़ना चाहिए था लेकिन इस आईडी पर सिर्फ 627 रुपये टैक्स निर्धारित किया गया है जो न्यूनतम है।
सूत्रों के मुताबिक जनकपुरी में जिस आईडी पर बिल घटाया गया है, वहां टेलीफाेन टॉवर लगा है। नगर निगम के कर्मचारियों ने पूरे मकान पर दोबारा टैक्स लगा दिया। पहले से लगातार टैक्स देते आ रहे मकान मालिक के टॉवर पर चार गुना टैक्स लगाने की शिकायत करने पर तत्कालीन सीटीओ ने जांच कराई तो मामला डबल डिमांड का निकला। इसके बाद बिल दुरुस्त कराकर वास्तविक टैक्स जमा कराया गया है। नियमविरुद्ध ढंग से इस बिल में सीवर और जलकर भी शामिल कर दिया गया।
डिमांड थी 3198 रुपये की, भेज दिया 14 लाख का बिल
पिछले साल नगर निगम के टैक्स विभाग ने जनकपुरी में ही एक दुकान का गलत बिल बनाकर छह लाख रुपये की वसूली की थी जबकि दुकान का वास्तविक बिल 45 हजार ही था। मेयर उमेश गौतम से शिकायत हुई थी कि जनकपुरी में मांगेलाल के भवन संख्या- 4 पर चालू मांग 3198 रुपये वार्षिक ही थी लेकिन उसे ग़ृहकर, सीवर कर और जल कर का 14 लाख 11 हजार 674 .32 रुपये का बिल भेज दिया गया।
इसके बाद दुकान सील कर दी गई। छह लाख रुपये जमा करने पर सील खोली गई। शिकायत में कहा गया था कि नगर निगम बने 32 साल हुए हैं। अगर तभी से दुकान पर बकाया मान लिया जाए तो भी वह 95 हजार का बनता है और ब्याज तीन लाख से ज्यादा नहीं हो सकता।
मेयर ने तत्कालीन नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इस पर नाराजगी जताते हुए इसकी जांच कराने और दोषी कर्मचारी को दंडित करने को कहा था। लेकिन फिर भी किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। यही नहीं, दुकान मालिक से जमा कराया गया अतिरिक्त पैसा भी अब तक नहीं लौटाया गया। अब यह धनराशि अगले सालों में समायोजित करने की बात कही जा रही है।
सफाई कराने और टूटी सड़कें बनवाने की फरियाद पर पूछते हैं कि टैक्स जमा किया
नगर निगम में शिकायतों का समाधान कराना पहले ही मुश्किल था, दो साल पहले उसकी वित्तीय हालत चरमराने के बाद और मुश्किल हो गया है। अफसरों ने गंदगी और टूटी सड़कों की समस्याएं लेकर आने वालों को खामोश करने के लिए उनसे टैक्स अदायगी की रसीदें मांगनी शुरू कर दी हैं।
रसीदें न दिखा पाने पर उन्हें पहले इलाके में सारे लोगों से टैक्स जमा कराने का दो टूक जवाब देकर लौटा दिया जाता है। दूसरी ओर नगर निगम के ही टैक्स विभाग में सालों से लगातार घपले सामने आ रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सबसे ज्यादा शिकायतें शहर की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों पर टैक्स कम लगाने की हैं, जिनकी वजह से नगर निगम को राजस्व की भारी क्षति होने के मामले सामने आ चुके हैं।
टैक्स विभाग में टैक्स आईडी खत्म कर दिए जाने की जांच करा रहे हैं। किन परिस्थितियों में आईडी को समाप्त किया गया, आईडी खत्म की गई तो टैक्स कम क्यों किया और किस अफसर ने यह कराया, इस बारे में रिपोर्ट मांगी है--- निधि गुप्ता वत्स, नगर आयुक्त।
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