महुआ को बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं आरोप: फिरहाद हकीम
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम ने सोमवार को दावा किया कि संसद में ‘सवाल पूछने के बदले पैसे लेने’ का तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा पर लगाया गया आरोप उन्हें बदनाम करने की कोशिश है, क्योंकि वह केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के खिलाफ काफी मुखर हैं।
हकीम ने कहा कि नदिया जिले के कृष्णानगर से सांसद मोइत्रा इस मुश्किल स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण उनकी छवि को धूमिल करने की साजिश है। शहरी विकास और नगर निकाय कार्य मंत्री ने कहा, “मैं पार्टी का प्रवक्ता नहीं हूं इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता कि पार्टी क्या सोच रही है।
निजी तौर पर मेरा मानना है कि यह उन्हें चुप कराने की कोशिश है।” हकीम कोलकाता के महापौर भी हैं। उन्होंने दावा किया कि मोइत्रा भाजपा सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध करती है, इसलिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश के तहत ये आरोप लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले हकीम ने समाचार चैनल ‘एबीपी आनंद’ को दिए एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की।
टीएमसी के प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन ने रविवार को कहा था कि मोइत्रा आरोपों पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं, इसलिए पार्टी अब संसद की आचार समिति की जांच का इंतजार करेगी क्योंकि यह विषय उनके (टीएमसी सांसद के) 'अधिकारों और विशेषाधिकारों' से जुड़ा हुआ है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई ने आरोप लगाया है कि रियल एस्टेट से लेकर ऊर्जा तक के विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाले हीरानंदानी समूह के सीईओ दर्शन हीरानंदानी ने संसद में सवाल पूछने के लिए मोइत्रा को पैसे दिए थे। इसके जवाब में, मोइत्रा ने उनके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
दुबे की शिकायत को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की आचार समिति को भेज दिया है। वहीं, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के नेता राहुल सिन्हा ने कहा, "जब भी उसके नेता मुसीबत में पड़ते हैं तो टीएमसी हमेशा अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। पार्टी अब इस मुद्दे पर बंटी हुई है।
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