बरेली: सावधान! साइकिल-फुटपाथ पर बिक रहे मास्क नहीं हैं सुरक्षित
बरेली, अमृत विचार। साइकिल, ठेले और फुटपाथ पर लगी दुकान से मास्क खरीदने वाले सावधानी बरतें। बिना साफ किए मास्क पहनने की चूक आपको कोरोना संक्रमित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है गली, मोहल्लों में जिस तरह खुले में मास्क की बिक्री हो रही है और तमाम लोग इसे छूकर देख रहे हैं, इससे …
बरेली, अमृत विचार। साइकिल, ठेले और फुटपाथ पर लगी दुकान से मास्क खरीदने वाले सावधानी बरतें। बिना साफ किए मास्क पहनने की चूक आपको कोरोना संक्रमित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है गली, मोहल्लों में जिस तरह खुले में मास्क की बिक्री हो रही है और तमाम लोग इसे छूकर देख रहे हैं, इससे मास्क संक्रमित हो सकते हैं। लिहाजा, मास्क खरीद के बाद अच्छी तरह साबुन से धोकर ही इस्तेमाल करें।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए बाजार में मास्क की मांग तेजी से बढ़ी है। जिले में करीब एक लाख मास्क अकेले स्वयं सहायता समूह बन चुके हैं। कई समाजिक संस्थाएं भी इसी काम में लगी हैं। वर्तमान में आलम यह है कि पहले लाकडाउन में जहां केवल दवा की दुकानों और बड़ा बाजार में मास्क बिकते थे, वहीं अब हर गली-चौराहे और नुक्कड़ पर मास्क बिक रहे हैं।
साइकिल से लेकर फुटपाथ पर मास्क की दुकानें सजी हैं। मास्क की बिक्री करने वाले भले ही मास्क का उपयोग न करें, लेकिन तमाम लोग श्यामंगज, सेटेलाइट बस स्टैंड, पुराना शहर, सिविल लाइंस आदि स्थानों पर मास्क हाथों में लेकर मोलभाव करते देखे जा सकते हैं।
अगर उनके बजट में मास्क मिलता है तो उसे खरीदते हैं, नहीं तो उसे रख देते हैं। कई तो मास्क पहनकर साइज भी देखते हैं। यह स्थिति लोगों के बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। मास्क खरीदने पहुंचा व्यक्ति अगर कोरोना संक्रमण से संक्रमित है, तो बाद में उस मास्क को छूने या पहनने वाला भी संक्रमित हो सकता है।
इस प्रक्रिया से संक्रमण कई गुना बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसा नहीं है कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है, सब कुछ जानकर भी वह अंजान बने बैठे हैं। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने का एक कारण यह भी बताया जाता है।
“साइकिल व फुटपाथ पर बिकने वाला मास्क पहनकर लोग खुद को सुरक्षित मान रहे हैं, लेकिन इससे संक्रमण का खतरा ज्यादा है। उन मास्क को लोग छू भी रहे हैं और उसको देख कर रख भी दे रहे हैं। ऐसे में यदि संक्रमण से बचने के लिए अगर मास्क खरीदें तो उसे साबुन से धुलकर ही पहनें। ऐसा नहीं करने पर हाई रिस्क की श्रेणी में रहेंगे।”— डॉ. वागीश वैश्य, वरिष्ठ फिजिशियन
