वाराणसी : कुपोषित क्षय रोगियों की होगी पहचान, गोद लेकर किया जाएगा स्वस्थ

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Edited By Amrit Vichar
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वाराणसी, अमृत विचार। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएम-टीबीएमबीए) के अंतर्गत जनपद में कुपोषित क्षय रोगियों को गोद लेने की शुरुआत की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि शासन की ओर से मिले निर्देश के क्रम में जिले में मौजूद वर्तमान कुपोषित क्षय रोगियों को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 
 
उन्होंने कहा कि इसके लिए जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर बाडी मास इंडेक्स (बी०एम०आई०) की मापने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। बीएमआई की गणना करते हुये 18 किलो ग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम वाले रोगियों को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से गोद लेकर पोषण पोटली दिलाने तथा छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से अतिरिक्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुपोषण और क्षय रोग का सीधा संबंध होता है। टीबी रोगियों को बेहतर प्रोटीन युक्त आहार न मिल पाने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। लगातार वजन में भी कमी होती है। इस वजह से वह कुपोषण की स्थिति में भी आ सकता है। इसलिए कोई भी टीबी रोगी गंभीर स्थिति में न पहुंचे, इसके लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 
 
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ पीयूष राय ने बताया कि नोटिफिकेशन अधिक होने के साथ ही रोगियों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा करना भी आवश्यक है। वर्तमान में जनपद का टीबी सक्सेस रेट 91 प्रतिशत है। दूसरी ओर वर्तमान में 7647 क्षय रोगी उपचार पर हैं। जनपद में निक्षय मित्रों की संख्या 2475 है। उपचारित रोगियों में से 6193 क्षय रोगियों को निक्षय मित्रों द्वारा गोद लिया जा चुका है। शेष टीबी रोगियों के गोद लिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। 
 
 

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