पीलीभीत: फॉगिंग के नाम पर धुआं छोड़ रही मशीनें, 26 दिन में साढ़े पांच लाख खर्च...मच्छर बरकरार !

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर आदि संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही है। नगर पालिका की ओर से शहर में फॉगिंग और दवा का छिड़काव कराने के दावे तो किए जा रहे हैं। मगर न तो मच्छरों का प्रकोप कम हो सका, न ही गंदगी पूरी तरह से दूर हो सकी है।

अधिकांश इलाकों में फॉगिंग न होने की शिकायत बनी हुई है। जबकि फॉगिंग होने के बाद भी दवा के नाम पर सिर्फ धुआं छोड़ने की बात लोग कह रहे हैं। फॉगिंग में इस्तेमाल दवा की जांच कराने की भी मांग की गई है। जबकि विशेष अभियान के दौरान फॉगिंग पर 26 दिनों में साढ़े पांच लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।

ढाई लाख की आबादी वाले शहर में कुल 27 वार्ड हैं। जिसमें 59 मोहल्ले और 21 कॉलोनियां आती हैं। इन वार्डों में सफाई व्यवस्था, लाइट व्यवस्था और पेयजल की व्यवस्था करने का जिम्मा नगरपालिका पर है।  मौसम का मिजाज बदलते ही मच्छरों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। हर साल की तरह इस बार भी डेंगू-मलेरिया का प्रकोप है। हर दूसरे घर में बुखार का मरीज है।

मच्छरों का आतंक शुरू होने के बाद नगर पालिका प्रत्येक वार्ड में रोस्टर बनाकर फॉगिंग कराने का दावा कर रही है।  शहर में लगातार फॉगिंग और दवा छिड़काव की बात कही जा रही है। जिम्मेदारों की मानें तो छह सितंबर से फॉगिंग चल रही है। वार्डो का रोस्टर बनाकर काम कराया जा रहा है।

इधर, बुखार का प्रकोप बढ़ते ही एक अक्टूबर से विशेष अभियान चलाकर फॉगिंग और दवा का छिड़काव भी हो रहा है। मगर शहरवासियों की मानें तो अधिकांश इलाकों में फॉगिंग और दवा छिड़काव नहीं हो सका है। फॉगिंग मच्छरों पर बेअसर साबित हो रही है। ऐसे में इस्तेमाल की जा रही दवा की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े किए गए हैं।

शहर के मोहल्ला डालचंद, खकरा, आसफजान, साहूकारा, बेनी चौधरी, मोहम्मद फारूक, शिवनगर कालोनी समेत तमाम इलाकों में लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। बता दें कि इन इलाकों में मच्छरों की ब्रीड पनप रही है, जो शहरवासियों के लिए मुसीबत बन रही है। इधर, विशेषज्ञों की मानें तो फॉगिंग का तरीका बहुत पुराना है। यह अब बेअसर हो गया है।

ऐसा इसलिए शहर में मच्छरों की भरमार है। सफाई व्यवस्था की बात करें तो एकता सरोवर में जहां लोग सुबह की सैर करते हैं। वहीं, पीछे की तरफ कूड़े का ढेर लगा हुआ है। फॉगिंग और दवा का छिड़काव भी संतोषजनक नहीं लगता। छिड़कवाई जा रही दवा की जांच होनी चाहिए--- अनूप अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।

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