पीलीभीत: गुडवर्क गिनाते रहे जिम्मेदार, हत्याकांड से गुस्साई भीड़ ने कर दिया बवाल...राहगीर पुलिस के सामने पिटे, जानिए मामला
पीलीभीत, अमृत विचार। लूट के बाद बैंकमर्मी की हत्या के मामले में सात आरोपियों की धरकपड़ के बाद पुलिस गुडवर्क को लेकर व्यस्त हो गई। गुडवर्क गिनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई और दो समुदायों से जुड़ा मामला होने के बाद बन रही तनाव की स्थिति के बावजूद लापरवाही बरती गई।
नतीजतन गुरुवार दोपहर में घटना के बाद गुस्साई भीड़ गौहनिया रेलवे कॉसिंग के पास पहुंची और शराब की दुकानों को धमकाकर बंद कराया। इतना ही नहीं सीसीटीवी कैमरे और बिजली केबल भी तोड़ दी। भीड़ के सामने वहां मुस्तैद पुलिसकर्मी बेबस दिखाई दिए। उग्र भीड़ ने दो राहगीरों की भी पिटाई कर दी। इसके बाद एसडीएम सीओ पुलिस बल के साथ पहुंचे और सख्ती कर खदेड़ा। शांति व्यवस्था बनाए रखने को मौके पर फोर्स बढ़ा दिया गया है।
बता दें कि अमरिया थाना क्षेत्र के गांव गायबोझ निवासी मोहम्मद यूसुफ अलीगढ़ स्थित बंधन बैंक में काम करता था। शनिवार को वह ट्रेन से पीलीभीत पहुंचा। इसके बाद अधिक रात होने के चलते घर न जाकर अपने मामा के घर शहर से सटे चिड़ियादाह गांव जा रहा था।
पांच दिन लापता रहने के बाद बुधवार सुबह पहले उसके पकड़े गौहनिया रेलवे क्रासिंग पर मिले थे। इसके बाद शाम को शव तीन किमी दूर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के पास गन्ने के खेत में पड़ा मिला था। लूट के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। पिता मकसूद अहमद की तहरीर पर सुनगढ़ी पुलिस ने गांव खपरैल गौटिया निवासी संजीव भारती,
गांव चिड़ियादाह निवासी राजकुमार, सूरज कुमार तिवारी उर्फ बब्लू पंडित, जहानाबाद के गांव खमरिया पुल निवासी नितिन, बिलसंडा के गांव ईटगांव निवासी रोहन सागर उर्फ गब्बर हाल निवासी एकतानगर थाना कोतवाली, चिड़ियादाह निवासी अमन वर्मा व दीपक के खिलाफ हत्या कर साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट दर्ज कर ली।
ताबड़तोड़ दबिश देकर आरोपियों को रामलीला तिराहे के पास से बुधवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यूसुफ का ई- रिक्शा से उतरने के बाद चिड़ियादाह की ओर जाते वक्त पीछा किया। उसके बाद पकड़कर अंधेरे मे ले गए और बैग व जेब की तलाशी ली। यूसुफ के विरोध करने पर मारपीट करते हुए उसके मोबाइल से पैसे ट्रांसफर करा लिए। यूसुफ की डंडों और ईंटों से पीट-पीटकर हत्या कर दी।
हत्या करने से पहले उसके खाते से 98000 रुपये ट्रांसफर कराए थे। पुलिस ने नकदी और डंडे भी बरामद कर लिए। गुरुवार दोपहर को एएसपी अनिल कुमार यादव इस हत्याकांड के बाद की गई कार्रवाई के गुडवर्क को गिनाने के लिए सुनगढ़ी थाने पहुंचे थे। उधर, घटना के बाद से ही चिड़ियादाह व आसपास के ग्रामीण गुस्साए हुए थे। गौहनिया रेलवे क्रासिंग के पास शराब की दुकानों को हटवाने को लेकर भी मांग कर चुके थे। इसे देखते हुए चार पुलिसकर्मी वहां तैनात किए गए थे।
इसी बीच भीड़ अचानक दोपहर को वहां पहंची और हंगामा कर दिया। शराब की दुकान के सेल्समैन से गाली गलौज करते हुए दुकान बंद करा दी। भीड़ अधिक और उग्र होने के चलते मौजूद पुलिसकर्मी बैकफुट पर आते दिखाई दिए। भीड़ ने दुकानों में तोड़फोड़ की और दो राहगीरों पर भी हमलावर हो गई।
दुकान के बाहर लगा सीसीटीवी कैमरा और विद्युत मीटर -केबल भी तोड़ दिया। हंगामे की सूचना पर पर एसडीएम देवेंद्र सिंह, सीओ सिटी अंशु जैन, सुनगढ़ी इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी, कोतवाल नरेश त्यागी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। शांत कराने पर भीड़ पुलिस से भी नोकझोंक करने लगी। फिर सख्ती कर पुलिस ने भीड़ को खदेड़ दिया। इसके बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने को पुलिस-पीएसी की तैनाती कर दी गई।
तो शुरुआत से लापरवाह रही सुनगढ़ी पुलिस
बताते हैं कि इस पूरे मामले में सुनगढ़ी पुलिस शुरुआत से ही लापरवाह रही। परिजन की मानें तो बैंककर्मी के लापता होने के बाद पहले सड़ा पुलिस चौकी पर गए और फिर सुनगढ़ी थाने। मगर मामले को टाल दिया गया। जिसके बाद मृतक के चाचा ने अमरिया थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके अलावा घटना उसी रात अंजाम दे दी गई थी। इसके बाद भी पुलिस को पांच दिन तक मुख्य मार्ग में हुई वारदात का पता तक नहीं लगा।
जबकि इस मार्ग पर पुलिस भ्रमणशील होने और पिकेट तैनाती के भी दावे करती है। जिस निर्माणाधीन बाइपास के पास शव मिला है, वहां पर दिन में यूपी 112 पुलिस भी रहती है। बताते हैं कि इसके बावजूद वह नशेड़ियों का अड़्डा बना रहता है। मगर सात आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पुलिस गुडवर्क को बयां करती रही और इस लापरवाही पर जिम्मेदार पर्दा डाल गए।
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