बरेली: ऐसा स्वास्थ्य विभाग... सफाई, सहारा और संवेदना, कुछ भी तो नहीं यहां

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार: जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक सोमवार को ओपीडी में 1701 मरीज पहुंचे। डॉक्टरों के मुताबिक इनमें करीब 25 फीसदी बुखार पीड़ित थे।

इलाज की गारंटी नहीं, संक्रमण का डर: जिले में पहली बार डेंगू का इतना भीषण प्रकोप है कि मरीजों की तादाद ने 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने भले ही अब तक डेंगू के अपने खाते में एक भी मौत दर्ज नहीं की है लेकिन जिले भर में अब तक सौ से भी ज्यादा ऐसे लोग दम तोड़ चुके हैं जिनमें डेंगू के लक्षण थे।

डेंगू की दहशत से जूझ रहे बुखार पीड़ित लोगों की जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में खून की जांच कराने के लिए रोज लंबी कतारें लग रही है, लेकिन पैथ लैब के गेट के बाहर ही कई दिनों से पानी भरा हुआ है जहां मच्छरों का लार्वा भी पनप रहा है। जाहिर है कि अफसर बस ड्यूटी पर दिख रहे हैं, ड्यूटी कर नहीं रहे।

70 साल के दिव्यांग बुजुर्ग को लगवा चुके 20 चक्कर: सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित दिव्यांग जन कार्यालय में हर सोमवार को लगने वाले शिविर में दिव्यांगों की दुर्दशा के नजारे आम हैं। जिले भर के दिव्यांगों की भीड़ प्रमाणपत्र बनवाने के लिए यहां सुबह आठ बजे ही इकट्ठी हो जाती है। वे घंटों इंतजार करते हैं मगर कोई उनकी सुध नहीं लेता।

इस सोमवार को शेरगढ़ के गांव गुलड़िया से बेटी के साथ आए 70 वर्षीय दिव्यांग बुजुर्ग ने बताया कि पिछले चार महीनों में उनका यह 20 वां चक्कर है, अब तक उनका प्रमाणपत्र तक नहीं बना है। हर बार कोई न कोई आपत्ति लगाकर लौटा दिया जाता है।

बुजुर्गों के लिए व्हील चेयर तक नहीं: संवेदनशीलता के सरकारी दावों की असलियत भी सोमवार को जिला अस्पताल में साफ दिखी। ओपीडी में आने वाले बुजुर्ग मरीजों को व्हील चेयर तक मयस्सर नहीं हुई। तीमारदार उन्हें गोद में लेकर इधर से उधर भटकते रहे।

किट ही नहीं देंगे, डेंगू-मलेरिया की जांच कैसे होगी: तीन सौ बेड अस्पताल में डेंगू वार्ड तो बना दिया गया है लेकिन सप्ताह भर बाद भी यहां डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड की जांच के लिए किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। लैब प्रभारी की ओर से पत्र लिखे जाने के बाद भी अब तक किट नहीं दी गई हैं, जिस वजह से जांच नहीं हो पा रही है। यहां फिजिशियन भी सिर्फ एक है, उन्हीं पर एआरवी केंद्र के साथ ओपीडी की भी जिम्मेदारी है।

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