बरेली: बगैर पूर्व अनुमति जमीन दान में लेकर नगर निगम की तरह फंसा पंचायत राज विभाग, जानिए क्या है मामला
गांव भूरीपुर में दान में ली थी 630 गज जमीन, निबंधन विभाग ने जारी की 3.89 लाख के स्टांप शुल्क की आरसी
बरेली, अमृत विचार। रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भूरीपुर में शासन की अनुमति लिए बगैर सरकार के पक्ष में जमीन दान में लेने के मामले में वैसा ही पेच फंस गया है, जैसा मेयर उमेश गौतम की ओर से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए गांव बहगुलपुर में जमीन दान करने पर फंसा था। निबंधन विभाग ने इस रजिस्ट्री पर 3.89 लाख के स्टांप शुल्क की वसूली के लिए आरसी जारी कर दी है। पंचायत राज विभाग सरकार को होने वाली रजिस्ट्री को स्टांप शुल्क से मुक्त रखने के शासनादेश का हवाला दे रहा है लेकिन निबंधन विभाग इसे भी सुनने को तैयार नहीं है।
आरसी जारी होने के बाद पंचायत राज विभाग ने इसके खिलाफ एआईजी कोर्ट में वाद दायर किया था जिसके खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। दरअसल, ग्राम पंचायत भूरीपुर में पूर्व प्रधान बादाम सिंह की ओर से फरवरी 2020 में ग्राम पंचायत को गाटा नंबर 183 पर स्थित अपनी 630 गज जमीन दान दी थी। आंवला तहसील के निबंधन कार्यालय में इस जमीन की रजिस्ट्री हुई थी जिस पर पंचायती राज विभाग के प्रतिनिधि के तौर पर एडीओ पंचायत करन सिंह ने हस्ताक्षर किए थे। रजिस्ट्री होने के कुछ ही दिन बाद आंवला निबंधन कार्यालय की ओर से एडीओ पंचायत को 3.89 लाख के स्टांप शुल्क की आरसी जारी कर दी गई।
पंचायत राज विभाग ने इस आरसी पर यह कहते हुए आपत्ति की कि शासन का सरकार को दान की जाने वाली जमीन को स्टांप ड्यूटी से मुक्त रखने का आदेश है लेकिन निबंधन विभाग आरसी वापस लेने को तैयार नहीं हुआ। बता दें कि ऐसा ही मामला मेयर उमेश गौतम की ओर से राज्यपाल के नाम बहगुलपुर में जमीन की रजिस्ट्री कराने पर हुआ था। रजऊ परसपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद होने के बाद बहगुलपुर में प्लांट स्थापित करने के लिए यह जमीन दान की गई थी। सौ रुपये के स्टांप पर इसकी रजिस्ट्री हुई थी। चूंकि इसके लिए भी राज्यपाल से अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए इस पर स्टांप शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया था।
एआईजी स्टांप ने नहीं माना शासनादेश, कहा- हाईकोर्ट जाओ
निबंधन कार्यालय की ओर से जारी आरसी के खिलाफ एडीओ पंचायत ने एआईजी स्टांप की कोर्ट में वाद दायर किया लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। एडीओ पंचायत रामनगर करन सिंंह के अनुसार वाद दायर करने के बाद एआईजी स्टांप की कोर्ट में उन्होंने वह शासनादेश भी दिखाया जिसमें सरकार को किए गए दान को स्टांप ड्यूटी लागू न होने की बात कही गई है लेकिन उनसे कोर्ट में राज्यपाल की मोहर वाला शासनादेश दिखाने को कहा गया। इसके बाद आरसी को सही बताते हुए हाईकोर्ट में जाकर अपील करने को कह दिया गया।
हाईकोर्ट ने आधी रकम जमा करने को कहा
एडीओ पंचायत की ओर से अब हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया गया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक याची को आरसी का आधा पैसा जमा करने का आदेश दिया है। अब पैसे एडीओ पंचायत को जमा करने हैं।
सरकार को जमीन दान करने पर स्टांप ड्यूटी लागू नहीं होती। ऐसा पहली बार देख रहा हूं कि ऐसे मामले में आरसी जारी की गई है। एआईजी स्टांप से बात हुई है। डीएम को पूरे प्रकरण से अवगत कराया जाएगा। रजिस्ट्री के लिए एडीओ पंचायत को अधिकृत किया था---- धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ।
किसी रजिस्ट्री को स्टांप ड्यूटी से मुक्त करने की एक प्रक्रिया होती है। शासन से पहले अनुमति लेने के बाद ही जमीन दान की जा सकती है। यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा, उस पर अमल किया जाएगा--- तेज सिंह यादव, एआईजी स्टांप।
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