कोरोना को लेकर चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 सितंबर को सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर चर्चा की जाएगी। देश में जिस तरह कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उससे सरकार की चिंता बढ़ना जायज है। एक तरफ जहां देश अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है, उसके …
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 सितंबर को सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर चर्चा की जाएगी। देश में जिस तरह कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उससे सरकार की चिंता बढ़ना जायज है। एक तरफ जहां देश अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है, उसके बीच में प्रधानमंत्री का मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक का फैसला संक्रमण के खतरे की गंभीरता की ओर ईशारा करता है, क्योंकि अब हर रोज 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। भले ही, शनिवार को यह आंकड़ा 86 हजार पर ठहरा हो, लेकिन इससे यह नहीं मान लेना चाहिए कि अब लगातार ही मामले कम होते जाएंगे।
अब आमतौर पर यह देखने को मिल रहा है कि लोग कोरोना से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का पालन कम कर रहे हैं। जब ऐसी लापरवाही से बचना चाहिए था, उसका बढ़ना इस बात का संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कोरोना की रफ्तार और बढ़ेगी। विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि वर्तमान हालातों में संक्रमण के खतरे को कम करना मुश्किल है। जो हालात बने हुए हैं, उसमें ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर पहले पायदान पर आ जाएगा। वैसे तो, गंभीर मरीजों के मामले में भारत अभी भी अमेरिका से आगे है।
भारत में 53 लाख से भी ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 85 हजार 619 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में, संक्रमितों और मरने वालों की संख्या में कमी लानी ही होगी। शुरूआती दिनों में भारत ने दुनिया के सामने जो मिशाल पेश की थी, उसका कम समय में ही यूं धूमिल हो जाना गंभीर चिंता का विषय है। शायद इस बात की कसक प्रधानमंत्री को भी हो, इसीलिए एक बार फिर उनकी मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले भी प्रधानमंत्री कोरोना से बचाव के लिए बनाई जाने वाली रणनीति को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करते रहे हैं।
दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु आदि राज्यों में हालात बेहद खराब हैं, ऐसे में संक्रमितों की संख्या को कम करने के उपाय खोजने ही होंगे। इसमें राज्यों का क्या सुझाव आता है यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा। देश एक बार फिर लॉकडाउन की तरफ बढ़ेगा या फिर कोरोना संक्रिमतों की संख्या कम करने के कोई और रास्ते तलाशे जाएंगे, यह सवाल भले ही लोगों के जेहन में उठने लगा हो, लेकिन इस बात की जरूरत भी बढ़ रही है कि कोरोना की खराब स्थिति की जमीनी हकीकत को समझा जाए और उसके अनुसार उचित कदम उठाए जाएं, तभी संक्रमण को कम किया जा सकता है।
