शाहजहांपुरः घर वापसी के लिए ट्रेनों में जगह नहीं, जनरल कोच में भी मारामारी, यात्री परेशान
लंबी दूरी की ट्रेनों में बढ़ी प्रतीक्षा यूची, जनरल कोच में बढ़ी भीड़, फेस्टविल एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू
शाहजहांपुर, अमृत विचार: दिवाली और छठ पूजा के कारण दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब से लोग घर वापसी कर रहे हैं इसको लेकर जहां ट्रेनों में सीटें फुल हैं, वहीं जनरल कोचों में भी जगह न मिलने से मारामारी होती है। उधर, पूर्वांचल के लोग घर जाने के लिए रिजर्वेशन करा रहे हैं, लेकिन त्योहारी सीजन में प्रतीक्षा सूची लंबी होने से अनेक लोग बिना रिजर्वेशन कराए लौट रहे हैं।
हालांकि रेल प्रशासन यात्रियों की समस्या को दूर करने के लिए फेस्टविल एक्सप्रेस ट्रेन चला रहा है, लेकिन अधिक भीड़ के कारण सीटों को लेकर मारामारी होना तय है।10 नवंबर को धनतेरस और 12 नवंबर को दिवाली है, जबकि 19 नवंबर को छठ पूजा मनाई जाएगी। पूर्वांचल के लोग उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब में नौकरी और मजदूरी करते हैं।
यहां भी लोग सरकारी व प्राइवेट जॉब करते हैं। पूर्वाचल के लोगों के लिए छठ पूजा का अधिक महत्व होता है। जो परिवार समेत अपने घरों को जाते हैं। इस त्योहार में डाउन लाइन की ट्रेनों में भीड़ रहती है। लोगों ने घर जाने के लिए एक-दो महीने पहले रिजर्वेशन करा दिए थे, जिससे त्योहार पर घर जाने में कोई दिक्कत न हो। अब इस समय रिजर्वेशन की प्रतीक्षा सूची काफी लंबी हो गई है और दिन पर दिन प्रतीक्षा सूची बढ़ती जा रही है।
ट्रेनों में सीट कन्फर्म नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि बर्थ नहीं मिलेगी जनरल कोच में भीड़-भाड़ से बचने के लिए स्लीपर कोच में कहीं बैठकर चले जाएंगे। बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में मारामारी है और जनरल कोच में पैर रखने की जगह नहीं है।
किस ट्रेन में कितनी है वेटिंगः डाउन लाइन की श्रमजीवी एक्सप्रेस स्लीपर कोच में 10 नवंबर तक 198 वेटिंग, 12 को 129 वेटिंग, सत्याग्रह एक्सप्रेस में 10 नवंबर को 175 वेटिंग, 11 नवंबर को 150 वेटिंग, पदमावत एक्सप्रेस में 10 नवंबर को 175 वेटिंग, 11 नवंबर को 150 वेटिंग, गुहाटी एक्सप्रेस में 10 को 175 वेटिंग, 11 नवंबर को 150 वेटिंग, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में 9 को 150 वेटिंग व 10 नवंबर को 130 वेटिंग है। इसके अलावा डाउन लाइन की अन्य ट्रेनों में वेटिंग काफी लंबी है।
महिला व दिव्यांग कोच में घुस जाते हैं यात्रीः प्रत्येक ट्रेन की गार्ड की बोगी के पास महिला व दिव्यांग कोच होता है, लेकिन महिला कोच में जबरन पुरुष यात्री घुस जाते हैं। जिस कारण महिला यात्री प्लेटफार्म पर खड़ी रह जाती है। महिलाओं की पुरुष यात्रियों से जमकर नोकझोंक होती है।
इसी प्रकार दिव्यांग कोच में भी अन्य यात्री घुसकर सीट पर कब्ज कर लेते है। यदि महिला और दिव्यांग यात्री विरोध करता है तो लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। गार्ड से शिकायत की जाती है तो कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। न ही प्लेटफार्म पर आरपीएफ और जीआरपी के सिपाही नहीं दिखते हैं।
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