शाहजहांपुर: कर्मचारी एकमुश्त दस लाख पर अड़े, फैक्ट्री प्रबंधन पांच लाख पर रुका

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Edited By Amrit Vichar
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शाहजहांपुर, अमृत विचार। यूनाइटेड स्प्रिट लिमिटेड फैक्ट्री के कर्मचारियों की प्रबंधन और प्रशासन के साथ बृहस्पतिवार को दोपहर से शाम तक बैठक चली। फैक्ट्री प्रबंधन ने वॉलिंटियर सेपरेशन स्कीम (वीएसएस) का लाभ देने पर हामी भरी, लेकिन कर्मचारी वारिस प्रथा का लाभ देने से कम पर तैयार नहीं हुए। दोपहर से शाम तक बैठकें होती रहीं, लेकिन कर्मचारी सहमत नहीं हुए। इसके बाद शुक्रवार को अगले दौर की बैठक बुलाई गई है।

शराब फैक्ट्री के प्रोसेसिंग प्लांट पर मांगों को लेकर कर्मचारी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। अनशनकारी केवल पानी पी रहे हैं, इसके अलावा वह कुछ नहीं खा रहे हैं। पांच नवंबर को दोपहर बाद करीब 3:30 बजे अचानक अनशनकारी आशीष कुमार वर्मा और शिवकुमार की हालत बिगड़ गई थी।

इसके अलावा अनशनकारी कर्मचारी आलीशान की मौत भी हो चुकी है। कर्मचारी फैक्ट्री का संचालन कराने की मांग कर रहे हैं। फैक्ट्री प्रबंधन से वार्ता नहीं होने पर कर्मचारियों ने शुक्रवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। पांच नवंबर को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने अनशनकारी कर्मचारियों को मदद का भरोसा दिया था। इसके बाद प्रशासन की ओर से फैक्ट्री प्रबंधन से वार्ता की गई। 

बृहस्पतिवार को फैक्ट्री के सीनियर आल इंडिया हेड ग्लेन डिसूजा, कांट्रेक्टर सुरजीत मुखर्जी, लाइजनिंग ऑफिसर भगवान सहाय, जर्नल मैनेजर विवेकानंदा कलेक्ट्रेट पहुंचे। श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और डीएम उमेश प्रताप सिंह, एसपी अशोक कुमार मीणा, एडीएम प्रशासन संजय कुमार पांडेय सहित तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी बैठक के लिए कलेक्ट्रेट के गंगा सभागार पहुंचे।

लगभग 12 बजे बैठक शुरू हुई तो कर्मचारियों ने अपनी मांगें रखीं। कर्मचारियों ने कहा कि वारिस प्रथा के तहत कर्मचारी के वारिस को दस लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएं, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन के लोग इसके लिए तैयार नहीं हुए। फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि वह बस एक लाख रुपये ही दे सकते हैं। इसको लेकर घंटों तक वार्ता होती रही। दोपहर बाद कर्मचारी नेता अजीत दीक्षित, श्याम देव मिश्रा आदि बाहर आए।

कर्मचारी नेताओं को अधिकारियों ने समझाया
पहले दौर की बैठक के बाद बाहर आए कर्मचारी नेताओं को अधिकारियों ने समझाया कि फैक्ट्री प्रबंधन के अधिकारियों को यहां बुलाना बहुत बड़ी बात है। वित्त मंत्री की पहल पर यह लोग यहां आए हैं। अधिकारी दोबारा नहीं आएंगे। कर्मचारियों के पास एक ही मौका है। इसके बाद उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाएगा। ऐसे में उनकी मांगें अधूरी रह जाएंगी, लेकिन कर्मचारी वारिस प्रथा के तहत दस लाख रुपये की मांग करते रहे। कर्मचारियों ने कहा कि फैक्ट्री ने गैरकानूनी तरीके से उन्हें नौकरी से हटाया है। 

अगर कर्मचारियों को भूख हड़ताल से भी न्याय नहीं मिलता है तो वह अदालत की शरण में जाएंगे। इसके बाद कर्मचारी नेता दोबारा बैठक के लिए गए और शाम लगभग छह बजे तक दूसरे दौर की बैठक होती रही। कर्मचारी वारिस प्रथा के तहत दस लाख रुपये की मांग करते रहे, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। शाम को बैठक समाप्ती की घोषणा कर दी गई। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन के अधिकारियों से कहा कि वह शुक्रवार को होने वाली बैठक में हिस्सा लें। इससे पहले वह शाहजहांपुर छोड़कर न जाएं।

प्रशासनिक अधिकारियों, फैक्ट्री प्रबंधन, मजदूर यूनियन के लोगों की दिन में दो बार बैठक हुई। जिसमें कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति के लिए शुक्रवार को सुबह कलेक्ट्रेट में एक बैठक होगी।-संजय कुमार पांडेय, एडीएम प्रशासन।

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