विश्व निमोनिया दिवस कल : संक्रमण से हो रहीं लाखों मौतें, बचाव के लिए पढ़िये इन पांच डॉक्टरों की राय

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। पूरी दुनिया में 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। साल 2009 में निमोनिया बीमारी को लेकर आम जनमानस को जागरूक करने के लिए 12 नवंबर का दिन निर्धारित किया गया था। विश्व निमोनिया दिवस के दिन लोगों को इस बीमारी से बचाव रोकथाम और इलाज के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस बात की जानकारी शनिवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थित पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के एचओडी प्रोफेसर वेद प्रकाश ने पत्रकारों को दी है।

निमोनिया को लेकर डॉक्टर वेद प्रकाश ने बताया है कि बैक्टीरिया, वायरस और फफूंदी के कारण निमोनिया संक्रमण होता है। इससे फेफड़े प्रभावित होते हैं।

उन्होंने बताया कि निमोनिया दुनिया भर में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है, 25 लाख लोग पूरी दुनिया में इस बीमारी से हर साल दम तोड़ देते हैं। इसमें 5 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल होते हैं। जिसकी निमोनिया के कारण मौत हो जाती है। निमोनिया से हर साल 8 लाख से अधिक बच्चे अपनी जान गंवाते हैं।

सर्दियों में अधिक होता है संक्रमण

प्रो. वेद प्रकाश बताते हैं कि दुनिया भर में निमोनिया एक ऐसा संक्रमण है, जिससे अधिक संख्या में लोग ग्रसित होकर अस्पताल में भर्ती होते हैं। डॉक्टर वेद प्रकाश ने बताया कि निमोनिया बीमारी सर्दियों के मौसम में लोगों को ज्यादा परेशान करती है। ठंड के महीने में श्वसन संक्रमण अधिक होता है।

ड्रग रेजिस्टेंट जीवाणु बढ़ा रहे समस्या

डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि खुद से दवा खाना समस्या का सबब बन सकता है। बिना चिकित्सक के सलाह से जो लोग दवा खाते हैं वह अपने जीवन को खतरे में डालते हैं। इसमें झोलाछाप लोगों की भूमिका खतरनाक मानी जाती है। जिन बीमारियों में प्राइमरी दावाओं से इलाज हो सकता है। उसमें भी झोलाछाप हाई एंटीबायोटिक दवाई चलाकर जीवाणुओं को ड्रग रेजिस्टेंट कर देते हैं, जिससे उन पर दवाओं का असर नहीं पड़ता है। यह स्थिति और भी भयावह होती जा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए सबसे आसान और जरूरी तरीका यही है कि स्वास्थ्य संबंधी सलाह हमेशा डॉक्टर से ही लेनी चाहिए।

यह लक्षण हों तो अस्पताल जायें

केजीएमयू स्थित मेडिसिन विभाग के डॉ. केके सावलानी ने बताया कि निमोनिया फेफड़े का संक्रमण होता है। जब आपकी सांस तेज चलने लगे, बच्चों की पसली चलने लगे, शरीर में ऑक्सीजन कम होने लगे, अधिक थकान महसूस हो, साथ ही बेहोशी की हालत हो रही है तो तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। नहीं तो जीवन को खतरा हो सकता है।

निमोनिया को लेकर गंभीर लक्षणों की पहचान बहुत जरूरी है, यदि समय पर लक्षण पहचान कर मरीज भर्ती हो जाए तो उसकी जिंदगी बच सकती है।

बुजुर्गों को खतरा अधिक, गंभीर बीमार भी रहें सावधान

डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस बीमारी से बुजुर्गों तथा गंभीर रोग से पीड़ित लोगों को अधिक खतरा रहता है, उन्हें निमोनिया संक्रमण कभी भी अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में जो लोग किडनी, लिवर या फिर अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो उन लोगों को अधिक बचाव करना चाहिए और अपने चिकित्सक से टीकाकरण को लेकर सलाह लेनी चाहिए।

इस बीमारी अथवा संक्रमण से बचने के लिए सबसे अच्छा रास्ता टीकाकरण है। लेकिन बहुत लोग इस बात को जानते नहीं है कि टीकाकरण कराने से इस बीमारी से बचा जा सकता है । 

निमोनिया को जानिये और बचिये

केजीएमयू के प्रोफेसर आरएएस कुशवाहा ने बताया कि निमोनिया बीमारी के प्रति जागरूक रहने के लिए सबसे पहले इस बीमारी के लक्षणों को जानना महत्वपूर्ण है। क्योंकि लक्षणों के आधार पर ही सबसे पहले इस बीमारी की जानकारी हो सकती है। यदि किसी को खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ, सीने में दर्द, थकान एवं कमजोरी, तेजी से सांस चलने की समस्या आ रही है, तो उसे तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि यह निमोनिया संक्रमण  के लक्षण हो सकते हैं।

निमोनिया से बच्चों को इस तरह से बचायें

इस अवसर पर केजीएमयू स्थित बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एसएन सिंह ने बताया कि छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय उचित साफ सफाई की जरूरत होती है। साथ ही बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण कराना जरूरी होता है। टीकाकरण होने से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है। निमोनिया के लिए टीका उपलब्ध है बस उसे लगवाने की आवश्यकता है। टीकाकरण जरूर करायें और अपने बच्चों को निमोनिया से बचाएं।

चिकित्सकों ने स्वच्छता को भी प्रमुखता दी है। बताया है कि कम से कम 20 सेकेंड साबुन से हाथ धुलना चाहिए। तभी बीमारी से बचा जा सकता है। इसके अलावा तंबाकू और धुएं से बचाव जरूरी है। शराब और गलत दवाओं से परहेज करना चाहिए।

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