बरेली: आईजी के आदेश पर एसपी सिटी की जांच के बाद दर्ज हुई रिपोर्ट, भुता पुलिस ने हटा दीं गंभीर धाराएं...जानिए मामला
पीड़ित पक्ष का इंस्पेक्टर पर दोनों पक्षों से स्वार्थ सिद्ध करने का आरोप, शिकायत के बाद अब क्राइम ब्रांच को विवेचना
बरेली, अमृत विचार। साढ़े छह करोड़ की जमीन का सौदा कर एडवांस के तौर पर दिए गए डेढ़ करोड़ रुपये हड़पकर बैनामा करने करने से इन्कार करने और जालसाजी और जानलेवा हमले जैसे मामले में भुता पुलिस पर दोनों पक्षों से लाखों की वसूली के आरोप लगे हैं। मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि आईजी के आदेश पर प्रारंभिक जांच एसपी सिटी ने की थी, इसमें आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़ित पक्ष की इंस्पेक्टर भुता के खिलाफ पैसे लेकर कई गंभीर धाराएं हटा देने की शिकायत के बाद अब आईजी ने भुता पुलिस से विवेचना छीनकर क्राइम ब्रांच के सुपुर्द की है।
आईजी के आदेश पर 20 अगस्त 2023 को शहामतगंज निवासी अरविंद अग्रवाल की शिकायत पर किला इलाके के सुमित अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, भुता के गांव डंडिया नवाजिश अली निवासी रामसनेही, शिव कुमार, श्याम बिहारी और पूरन लाल के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, बलवा, जान से मारने की धमकी, मारपीट और जानलेवा हमले के गंभीर आरोपों में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
एफआईआर के मुताबिक आरोपियों से फरीदपुर स्थित 15.190 हेक्टेयर जमीन का करीब साढ़े छह करोड़ में सौदा हुआ था। एग्रीमेंट के बाद में अरविंद ने बतौर एडवांस डेढ़ करोड़ रुपये आरोपियों को दे दिए लेकिन इसके बाद आरोपियों ने जमीन का बैनामा नहीं किया। उल्टे अरविंद से दो करोड़ की रंगदारी मांगनी शुरू कर दी। छानबीन में पता चला कि वे लोग जमीन का पहले 2013 में भी एग्रीमेंट कर ढाई करोड़ रुपये हड़प चुके हैं। तनातनी के बीच आरोपियों ने तीन जुलाई को असलहों के साथ उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
अरविंद का आरोप है कि थाने के कई चक्कर काटने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो वह आईजी से मिले। आईजी के आदेश पर एसएसपी ने एसपी सिटी राहुल भाटी को जांच का निर्देश दिया। एसपी सिटी की जांच में आरोपों की पुष्टि हुई तब कहीं भुता पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।
अरविंद का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस दोनों पक्षों से सौदेबाजी की कोशिश में जुट गई। वादी से स्वार्थसिद्धि के बाद एक नवंबर को आरोपी सुमित और रामसनेही को गिरफ्तार कर तो लिया लेकिन फिर दूसरे पक्ष से भी सौदा कर जालसाजी की सारी धाराओं को हटा दिया। वादी पक्ष की शिकायत पर आईजी ने विवेचना अब क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करा दी है।
जांच और विवेचना में अंतर होता है। एसपी सिटी ने जांच के बाद बताया था कि कौन-कौन सी धाराएं बन रही हैं। लेकिन विवेचना में साक्ष्य नहीं मिले इसलिए अनावश्यक धाराएं हटा दी गई--- राजेश बाबू मिश्रा, इंस्पेक्टर भुता।
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