लखनऊ: नहीं दूर हुई यातायात स्टाफ की कमी, कैसे सुधरे बदहाल व्यवस्था, कई चौराहों पर नहीं तैनात हैं ट्रैफिक सिपाही
लखनऊ, अमृत विचार (रवि शंकर गुप्ता)। राजधानी में तमाम प्रयासों के बाद भी जाम की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। शहर में लगातार बढ़े वाहनों की संख्या के चलते ट्रैफिक कंट्रोल करने का प्लान हर बार धराशायी हो जाता है। हालत ये है कि शहर में ट्रैफिक सिपाहियों की भी कमी है स्थिति जिसके चलते कई चौराहों पर सिपाहियों की तैनाती ही नहीं है।
विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि शहर में ट्रैफिक सिपाहियो संख्या बढ़ाने की जरूरत है। जबकि मौजूदा में समय में अलग-अलग चौराहें पर 550 से अधिक ट्रैफिक सिपाही तैनात हैं। इसके बाद भी करीब इतने ही सिपाही और हों तब काम चलेगा। वहीं अधिकांश मार्गों पर जाम की स्थिति इतनी भीषण है कि लाखों लोग प्राभावित रहते हैं।
अधिकारी बताते हैं कि सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार यानी पांच दिन अधिक समस्या होती है इन दिनों में सभी आफिस भी खुलते हैं जिसके चलते ट्रैफिक मूवमेंट बढ़ जाता है। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा समय में 155 चौराहे और तिराहे हैं। इसमें 80 बड़े व 75 छोटे चौराहे हैं।

इस समयस 100 से अधिक चौराहें पर नियमित ट्रैफिक स्टाफ है। जबकि 55 चौराहों पर ट्रैफिक के साथ स्थानीय थाने की पुलिस तैनात होती है। 25 चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस वालेंटियर की मदद लेती है। इसके अलावा होमगार्डों की संख्या बढ़ाने का भी विचार किया जा रहा है।
इन चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
अवध चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, आईजीपी चौराहा, मुंशीपुलिया, अवध स्टेशन के पास कमता चौराहा, शहीद पथ के नीचे अहिमामऊ चौराहा, दुबग्गा चौराहा, चारबाग नाका चौराहा, हजरतगंज चौराहा, एयरपोर्ट चौराहा, गोमतीनगर पत्रकार चौराहा, हिन्द नगर, वीआईपी चौराहा और सीतापुर रोड पर मड़ियांव चौराहे पर अधिक ट्रैफिक रहता है।
ना सर्वे हुआ ना सिग्नल टाइमिंग में परिवर्तन
कई चौराहे हैं ऐसे हैं जहां पर अधिक वाहनों का अवागमन रहता है। जिसमें सिग्नल टाइम परिवर्तन करने की जरूरत है। अधिकारियों का कहना था कि सिग्नल टाइमिंग सर्वे के बाद बढ़ाई जाएगी लेकिन सर्वे नहीं हो सका ना सिग्नल टाइमिंग बढ़ सकी है।
हालत ये है की लोगों को एक चौराहा पार करने में 5 से 10 मिनट लग जाता है। आईटी और हजरतगंज जैसे चौराहों पर ग्रीन सिग्नल होने के बाद एक बार में वाहन गुजर नहीं पाते। इस बीच रेड सिग्नल हो जाता है। मौजूदा समय में 60 सेकेंड से लेकर 180 सेकेंड तक सिग्नल रेड और ग्रीन के बीच चलता रहता है।
मौजूदा समय में ये है व्यवस्था
- एक डीसीपी
-एक एडीसीपी
-दो एसीपी
-8 ट्रैफिक इंस्पेक्टर
-550 ट्रैफिक सिपाही
- 337 होमगार्ड
इस तरह है वाहनों का बोझ
लखनऊ में अगस्त सितंबर तक पंजीकृत वाहनों की संख्या 2822739 संख्या थी। जबकि यहां रोज निकलने वाले वाहन करीब साढ़े सात लाख है। वहीं प्रतिदिन दूसरे जनपदों से हर दिन साढ़े चार लाख से अधिक वाहन आते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
स्टाफ की कमी तो है ही फिर भी हम उन चौराहों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जहां पर अधिक वाहनों का आवागमन है। शहर के मुख्य चौराहों पर लगने वाले जाम के दौरान ट्रैफिक मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। जहां जाम की स्थिति ज्यादा है वहां ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती की जाती है। इसके अतिरिक्त ट्रैफिक की व्यवस्था को संभालने के लिए बाइक रेसरों की भी तैनाती की गई है..., हृदयेश कुमार, डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ।
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