Kanpur News : ओडिशा के सैंड आर्टिस्ट ने रेत में उकेरी अनेकता में एकता की भावना, लिखा ट्रिब्यूट टू लाला लाजपतराय

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कानपुर में ओडिशा के सैंड आर्टिस्ट ने रेत में उकेरी अनेकता में एकता की भावना।

कानपुर में ओडिशा के सैंड आर्टिस्ट ने रेत में उकेरी अनेकता में एकता की भावना। ग्रेजी में लिखा था ‘ट्रिब्यूट टू लाला लाजपतराय।’

कानपुर, अमृत विचार। दक्षिण एशिया बिरादरी के सम्मेलन में ओडिशा से आए सैंड आर्टिस्ट (रेत कला) हिमांशु शेखर परीड़ा गुरुवार शाम से महीन दानेदार गीली रेत के ढेर को तराश कर कुछ बनाने की कोशिश में तल्लीन थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि शुक्रवार को लाला लाजपतराय का शहीदी दिवस है जिसे सम्मेलन के विषय अनेकता में एकता से जोड़कर सैंडआर्ट के माध्यम से संदेश देने का प्रयास कर रहा हूं।

शुक्रवार को 11 बजे एकता को प्रदर्शित करते हुए रेत चित्र तैयार था जो उस एकता का संदेश दे रहा था जिसके पक्षधर खुद लाला जी थे। उसी के नीचे अंग्रेजी में लिखा था ‘ट्रिब्यूट टू लाला लाजपतराय।’ 

हिमांशु और संजय दोनों सैंड आर्टिस्ट गुरुवार को कानपुर पहुंचे। ओडिशा का सैंड आर्ट दुनिया में काफी प्रसिद्ध है। यही नहीं हर अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्ट प्रतियोगिता में ओडिशा की भागीदारी पक्की रहती है। पद्मश्री सुदर्शन पटनायक जैसे नामचीन सैंड आर्टिस्ट इसी राज्य के हैं। भारत में ओडिशा सैंडआर्ट की जन्मभूमि मानी जाती है।

सैंडआर्ट को हस्तशिल्प कला मानने वाले हिमांशु शेखर परीड़ा कहते हैं कि इसमें महीन दानेदार रेत और पानी का उपयोग किया जाता है। गंगा की रेत इस कला के लिए मुफीद है। वह कहते हैं कि समुद्र तट पर रेत कला का प्रदर्शन पर्यटकों को बहुत लुभाता है। वैश्विक मुद्दे, त्योहार, वर्ल्ड पीस, खेल की थीम पर सैंड आर्ट बनायी जाती है।

सैंड आर्ट से जुड़ी अविश्वसनीय कथाएं हैं। पुरी में पहली बार कवि बलराम दास महाप्रभु जगन्नाथ के रथ पर चढ़कर दर्शन की असफल चेष्टा और सेवायतों द्वारा अपमानित होने के बाद समुद्र तट पर महाप्रभु, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को उकेरा था। तब रथयात्रा के समय तो सैंड आर्टिस्ट रेत पानी का विलय करके भगवान के चित्र उकेरते हैं।

ये भी पढ़ें- UP STF Encounter: पिंटू सेंगर हत्याकांड में आया था नाम, ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर की थी हत्या... तब से चल रहा था फरार

संबंधित समाचार