चीन की बौखलाहट
भारत और चीन की चल रही तनातनी के बीच चीन की बदनीयती साफ तौर पर सामने आ गई है। दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता के लिए चीन की लगातार न नुकुर से यह साफ संकेत हैं कि वह सीमा पर तनाव कम करने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच भारतीय सैनिकों …
भारत और चीन की चल रही तनातनी के बीच चीन की बदनीयती साफ तौर पर सामने आ गई है। दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता के लिए चीन की लगातार न नुकुर से यह साफ संकेत हैं कि वह सीमा पर तनाव कम करने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच भारतीय सैनिकों ने सीमा पर तमाम महत्वपूर्ण पोस्ट पर कब्जा कर सैन्य और सामरिक रूप से बढ़त हासिल कर ली है जिससे चीन अब और बौखलाया है।
दरअसल हमारे देश की तरफ से हमेशा ही सीमा पर तनाव की स्थिति नहीं बनाने की रही है। भारतीय सैनिकों ने कभी भी संघर्ष विराम का उल्लंघन नहीं किया और रक्षात्मक नीति अपनाई गई। इस बात को चीन के साथ ही पाकिस्तान ने भी हमारी कमजोरी समझ लिया। मगर अब देश ने अपनी रक्षा नीति बदली है और दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देना शुरू किया है। पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक की तो पीओके में घुसकर आतंकी अड्डों को तबाह किया। यही नीति चीन के खिलाफ भी अपनाई गई और गलवान में उसके दुस्साहस का जवाब देने के साथ ही महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों पर कब्जा कर बेहद आक्रामक नीति का परिचय दिया है।
इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अपने देश में घटती लोकप्रियता के कारण वह परेशान हैं। कोरोना नीति को लेकर उनकी वैश्विक आलोचना हुई। इन मुद्दों से अपने देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने सीमा पर तनाव की स्थिति कायम करवाई। यह भी साफ है कि सीमा पर तनाव के बीच कमांडर स्तर की वार्ता से पीछे हटने की नीति भी उनकी है। सीमा पर तनाव कम होने का तरीका वार्ता है मगर जिनपिंग ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं। इससे पहले जब भी चीन के साथ सीमा पर तनाव हुआ हमेशा ही कमांडर स्तर पर वार्ता होती आई है।
गलवान प्रकरण के बाद भी ऐसा होना था मगर चीन ने ऐसा होने नहीं दिया। भारत को यह बात समझ में आ गई थी कि वार्ता पर नहीं मानने वाले चीन के साथ अब आक्रामक नीति अपनानी होगी। पारंपरिक युद्ध की कोई स्थिति नहीं है। चीनी सैनिक आमने-सामने की लड़ाई में भारतीय सेना के आगे कहीं नहीं ठहरते, यह चीन जानता है। भारतीय के सेना सीमा पर महत्वपूर्ण बेस पर कब्जा कर चुकी है और ऊंचाई वाली जगहों पर तैनात है। यहीं से चीन की बौखलाहट सामने आती है। मगर गलवान प्रकरण के बाद नीति बदल गई है। हवाई सीमा पर हम आगे हैं यही हमारी विजय है।
