शाहजहांपुर: सरकारी जमीनों पर हाथ साफ करने की फिराक में भू-माफिया, नगर निगम सहित कई जमीनों पर कब्जे का प्रयास
एक साल में सामने आए चार मामले, अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई अरबों की जमीन
शाहजहांपुर, अमृत विचार: जिले में तमाम सतर्कता के बाद भी भू- माफिया सरकारी जमीनों पर हाथ साफ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बीते एक साल के दौरान चार ऐसे मामले सामने आए, जिनसे अधिकारी-कर्मचारी और आमजन सभी चौंक गए। अरबों की सरकारी जमीन पर भू-माफिया कब्जा करके बैठ गए थे। पोल खुलने पर प्रशासन ने जमीनों को अवैध कब्जों से छुड़ाया। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि अनगिनत उदाहरण हैं।
शाहबाजनगर में कस्टोडियन की जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग करने का प्रयास किया गया। जुलाई माह में नगर निगम की जमीन पर चिनौर क्षेत्र में अवैध कब्जा किए जाने का खुलासा हुआ। इसी तरह सुनौरा अजमतपुर गांव में कुछ दबंगों की ओर से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का खुलासा हुआ। लगभग एक साल पहले नदी किनारे की तीन अरब रुपये की जमीन पर कब्जा किए जाने का पता चला।
सभी मामलों में सरकारी जमीनों को अवैध कब्जेदारों से छुड़ाया गया। इसी तरह तमाम अन्य सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराया जा चुका है। इसके अलावा अब भी करोड़ों की सरकारी जमीनें भू माफिया के कब्जे में हैं। यहां तक कि चिनौर में सरकारी तालाबों को पाटकर घर बनाए जा रहे हैं। जानकारी होने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
केस -1
कस्टोडियन की जमीन कब्जामुक्त कराई-- शाहबाजनगर में भू- माफिया ने हाल ही में मनमानी की सभी हदें पार करते हुए सरकारी जमीन पर प्लाटिंग शुरू कर दी थी। इसी बीच प्रशासन को सूचना मिल गई और जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया गया। यहां लगभग तीन बीघा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके प्लाटिंग करने का प्रयास किया जा रहा था। इसके बाद सदर तहसील की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। जांच में पता चला कि जमीन को जोतकर प्लाटिंग करने के लिए ईंट से डिमार्केशन की गई है। पूरी जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया है।
केस---2---
नगर निगम ने मुक्त कराई थी दो हजार वर्ग मीटर जमीन-- जुलाई माह में नगर निगम ने चिनौर की दो हजार वर्ग मीटर जमीन से अवैध कब्जा हटाकर कब्जा मुक्त कराया था। नगर क्षेत्र को सुव्यवस्थित और सुंदर बनाने के लिए मेयर अर्चना वर्मा और नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा के निर्देशन में अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई चल रही है।
इसी क्रम में सितंबर माह में राजस्व, प्रवर्तन दल और निर्माण विभाग के अधिकारियों की ओर से चिनौर में स्थित नगर निगम की गाटा संख्या 182 वाली जमीन को देखा गया।
पता चला कि लगभग 6000 वर्ग मीटर भूमि में से लगभग 2000 वर्ग मीटर पर क्षेत्रवासियों ने अवैध कब्जा कर रखा है।
केस-3--
हत्यारोपियों से मुक्त कराई थी सरकारी जमीन-- सुनौरा अजमतपुर गांव में अशोक सिंह हत्याकांड के आरोपियों द्वारा कब्जा की गई ग्राम समाज की सरकारी जमीन को राजस्व टीम द्वारा चिन्हित कर 13 अगस्त को कब्जामुक्त कराया गया था। इसके बाद जमीन को प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया गया था।
बता दें कि भाजपा नेता अशोक सिंह की 19 जून को गांव के राजेंद्र सिंह एवं उसके पुत्रों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मृतक के परिजनों व ग्रामीणों ने हत्यारोपियों पर गांव की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करने एवं दबंगई दिखाने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा था। इसके बाद कब्जा हटाया गया था।
केस-4
तीन अरब दो करोड़ की भूमि कराई थी कब्जा मुक्त-- ग्रामीणों ने गंगा और रामगंगा की जमीन पर कब्जा कर लिया था। प्रशासन ने लगभग एक साल पहले कब्जा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की थी। 3 अरब 2 करोड़ रुपये कीमत की भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया था। दरअसल जलालाबाद और कलान तहसील क्षेत्र के गांव सुखनैया, चचुआपुर, डूही जदीद समेत करीब आधा दर्जन गांव गंगा और रामगंगा नदी से सटे हैं।
नदी की 6312 बीघा खाली भूमि पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा था। इस भूमि की अनुमानित कीमत करीब तीन अरब दो करोड़ रुपये आंकी गई। डीएम के आदेश पर गंगा और रामगंगा की भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया गया था।
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। समय-समय पर इसको लेकर कार्रवाई की जाती है। बीते एक साल के दौरान कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। -संजय कुमार पांडेय, एडीएम प्रशासन।
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