Farrukhabad News: मडंप में गिरा दूल्हा, दुल्हन बोली- नहीं करूंगी शादी, लड़के पक्ष के लोगों ने कही ये बात

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फर्रुखाबाद में मडंप में गिरने पर दुल्हन ने शादी से इंकार कर दिया।

फर्रुखाबाद में दूल्हे के मडंप में गिरने पर दुल्हन ने शादी से इंकार कर दिया। जबकि लड़क पक्ष के लोगों ने पैर फिसल कर गिरने की बात कहीं।

फर्रुखाबाद, अमृत विचार। कोतवाली फतेहगढ़ में पड़ोसी जिला कन्नौज से आई बारात को बिना दुल्हन के वापस लौटना पड़ा। मडंप में दूल्हे का पैर फिसलने पर वह गिर गया। जिस पर दुल्हन ने शादी करने से इंकार कर दिया। दूल्हे के पिता ने कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर जनातियों से जेवर वापस दिलाने की मांग की।

फतेहगढ़ कोतवाली के मोहल्ला हाथी खाना में अशोक बाथम की बिटिया रीना की बारात 23 नवंबर को पड़ोसी जिला कन्नौज के गुरसहायगंज के मोहल्ला गांधीनगर से सचिन पुत्र प्रमोद लेकर आया था। बारात आने के बाद जनातियों ने बारात का स्वागत किया। इसके बाद द्वारचार हुआ। सुबह बारात को नाश्ता देने के बाद सचिन को विवाह के लिए बुलाया गया। हिंदू रीति रिवाज के बाद साथ विवाह संपन्न होने लगा।

भांवरें पढ़ने लगी, लेकिन यहां छठी भाँवर पर दूल्हे की किस्मत धोखा दे गई। वह किसी तरह मंडप में गिर गया । जिससे कन्या ने शादी करने से इंकार कर दिया। छठी भाँवर के बाद कन्या मंडप से उठ गई और दूल्हा को मंडप से भगा दिया। दूल्हा के पिता प्रमोद बाथम ने कोतवाली फतेहगढ़ में तहरीर दी। लड़के पक्ष के लोगों ने पैर फिसल कर गिरने की बात कहीं। जबकि लड़की पक्ष के लोग दौरे पड़ने की बात कहकर शादी से इंकार कर दिया। 

दूल्हे का पिता बोला एक बिखर गए बेटे की शादी के सपने

शादी टलने के बाद दूल्हा का पिता प्रमोद बाथम बहुत परेशान है। उनका कहना है कि अब अपने मोहल्ले में कैसे मुंह दिखायेगा। उसका कहना है कि उसके बेटे को कभी दौरा नहीं आया। आज किसी तरह वह छठी भाँवर पर मंडप में गिर गया। जिसको कन्या पक्ष के कुछ लोगों ने तूल दे दिया। जिससे उसके बेटे का मुकद्दर अंतिम समय मे धोखा दे गया। यह सब किस्मत का खेल है। लाखों रुपये खर्च करके उसने बेटे के शादी के सपने संजोए थे। लेकिन वह एक क्षण में रेत के महल की तरह बिखर गए।

कुदरत ने बिटिया को बचा लिया बीमार दूल्हे की दुल्हन बनने से

लड़की के पिता अशोक का कहना है कि भगवान जो करता अच्छा करता ही करता है। मेरी बेटी की किस्मत अच्छी थी। यदि एक सेकेंड बाद दूल्हा गिरता तो वह कहीं की नहीं रहती। सात फेरे लेने के बाद बिटिया को बीमार दूल्हे के साथ ही जाना पड़ता। मेरा कोई पुण्य रहा होगा जिससे मेरे बिटिया का विवाह बीमार दूल्हा के साथ होने से बच गया। कन्या का पिता कुदरत के इस फैसले पर बहुत प्रसन्न है। उसका पूरा परिवार गदगद नजर आ रहा है।

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