सरकार की मुश्किल

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Edited By Amrit Vichar
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केंद्र सरकार ने भले ही तीन कृषि विधेयकों को राज्यसभा में पास करा लिया हो, लेकिन आने वाले दिनों में सरकार की समस्या कम होने वाली नहीं है। कृषि बिल का चौतरफा विरोध तो हो ही रहा है, लेकिन जिस तरह अपने भी सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में सरकार …

केंद्र सरकार ने भले ही तीन कृषि विधेयकों को राज्यसभा में पास करा लिया हो, लेकिन आने वाले दिनों में सरकार की समस्या कम होने वाली नहीं है। कृषि बिल का चौतरफा विरोध तो हो ही रहा है, लेकिन जिस तरह अपने भी सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में सरकार की मुश्किल और बढ़ेगी।

सरकार की पुरानी सहयोगी अकाली दल के कोटे से मंत्री हरसिमरन कौर मंत्री पद से भी इस्तीफा दे ही चुकी हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच की तरफ से भी सरकार के विपक्ष में प्रतिक्रिया आई है। उसका कहना है कि नए कानूनों को लेकर सरकार की मंशा भले ही नेक हो लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिससे विपक्ष को भ्रम फैलाने का मौका मिल रहा है। सरकार को बिलों को लेकर उठती आवाजों और किसानों की प्रतिक्रियाओं का समाधान करना होगा।

बेहतर होता कि सरकार इन्हीं तीन बिलों में एमएसपी की गारंटी का जिक्र करती। अगर तीनों बिलों में यह व्यवस्था नहीं हो सकी तो फिर सरकार को चौथा बिल लाकर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देनी चाहिए। सरकार को कानून बनाकर एमएसपी से कम रेट पर खरीद को गैरकानूनी घोषित कर देना चाहिए, क्योंकि जब तक किसान के बीज का उचित मूल्य सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक हर व्यवस्था बेमानी है।

संगठन की इस प्रतिक्रिया का महत्व इसीलिए भी है क्योंकि किसानों की हमेशा एमएसपी को लेकर ही समस्या रही है। अगर, मूल्य की गारंटी तय हो जाए तो किसानों की सबसे बड़ी समस्या ही खत्म हो जाएगी, क्योंकि किसानों की मोलभाव की क्षमता कम होती है। अब सवाल चाहे खुले बाजार का हो या फिर मंडियों का, जब तक समर्थन मूल्य तय नहीं होगा तब तक किसानों को राहत नहीं मिलेगी। अगर किसान को खुला बाजार मिल भी जाएगा तो उससे इसीलिए काम चलने वाला नहीं है क्योंकि बाजार में जितने विकल्प किसानों के सामने होंगे उतने ही विकल्प खरीदारों के पास भी होंगे।

इसमें किसानों के मुकाबले ज्यादा फायदा खरीदारों को होगा, क्योंकि उनके पास किसानों की अपेक्षा मोलभाव की क्षमता अधिक होती है। जिसमें वे किसानों को अधिक लचीलापन दिखाने को मजबूर कर सकते हैं, क्योंकि बाजार में निकलने के बाद किसान के सामने माल को हर हाल में बेचने की भी मजबूरी रहेगी। इसीलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अगले बिल में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी को सुनिश्चित करना चाहिए।