Allahabad High Court: कैबिनेट मंत्री संजय कुमार निषाद को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निषाद पार्टी प्रमुख व प्रदेश के मत्स्य पालन मंत्री डा. संजय कुमार निषाद के खिलाफ वर्ष 2015 में रेलवे एक्ट के तहत दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने की राज्य सरकार की अर्जी स्वीकार कर ली है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की एकल पीठ ने राज्य सरकार की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें इसी साल सितंबर में सीजेएम, गोरखपुर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी।
उपरोक्त आदेश में विशेष लोक अभियोजक द्वारा सीआरपीसी की धारा 321 के तहत संजय कुमार निषाद के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही वापसी के लिए दाखिल याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने सीजेएम के आदेश को चुनौती देने वाली सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दाखिल डॉ निषाद की याचिका को भी अनुमति दे दी।
सीआरपीसी की धारा 321 में प्रावधान है कि लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक न्यायालय की सहमति से अभियोजन वापसी के लिए आवेदन दाखिल कर सकते हैं। गौरतलब है कि आठ जून 2015 को आरपीएफ थाना, गोरखपुर में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष संजय निषाद ने तमाम कार्यकर्त्ताओं के साथ सात जून 2015 को रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन किया।
इससे नाघर -सहजनवा रेल ट्रैक पर यातायात प्रभावित हुआ। सरकार ने सात अगस्त 2023 को केस वापस लेने का फैसला लिया। लोक अभियोजक ने धारा 321 में केस वापसी की अर्जी दी। मजिस्ट्रेट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अंतिम सुनवाई के चरण में लंबित है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून का हवाला देते हुए कहा गया कि मामले की वापसी के लिए हाईकोर्ट से कोई अनुमति नहीं ली गई है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अभियोजन वापस लेने के लिए न्यायालय की सहमति आवश्यक है। इस तरह का आवेदन प्रस्तुत करते समय लोक अभियोजक को अपने विवेक का उपयोग करना होगा और ऐसी अनुमति दिए जाने की स्थिति में समाज पर उसके प्रभाव का भी ध्यान रखना होगा।
इसके साथ ही केवल इस आधार पर अभियोजन वापसी का आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता कि पहल सरकार की ओर से हुई है। अदालत को वापसी के कारणों को जानने का प्रयास करना चाहिए। अंत में कोर्ट ने पाया कि मौजूदा मामले में सीजेएम का आदेश अवैधता और विकृति से ग्रस्त है। अतः इसे रद्द करते हुए अभियोजन वापसी के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत लोक अभियोजक द्वारा दाखिल आवेदन को अनुमति दे दी गई।
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