लखनऊ : सरकार ने पहले ही बढ़ा रखी है कर्मचारियों की मुश्किलें, इस नए नियम से हालत और होगी खराब
लखनऊ, अमृत विचार। भारत सरकार ने बंद की गई सुविधाओं को बहाल करने के बजाय अब शादी-विवाह, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई के उपयोग में लाई जा रही जीपीएफ बचत में कटौती करके 5 लाख सीमा निर्धारित कर दी है। इसको लेकर इप्सेफ ने निंदा की है।
इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्रा एवं महासचिव प्रेमचंद ने भारत सरकार द्वारा इपीएफ के बचत की सीमा 5 लाख तक निर्धारित करने की व्यवस्था को गलत बताया है। अध्यक्ष वीपी मिश्र ने खेद व्यक्त किया कि पुरानी पेंशन की बहाली महंगाई भत्ते की काटी गई चार किस्तों की बहाली ,सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों में से कई सुविधाएं बंद करने के बाद अब सरकार के इस व्यवस्था से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले नियमित नियुक्तियां,पदोन्नतियां समय से न करने से देश भर के कर्मचारी वैसे ही नाराज एवं दुखी हैं। जीपीएफ बचत की सीमा 5 लाख करने से कर्मचारी अधिक आक्रोशित हैं। प्रेमचंद ने बताया कि भारत सरकार कर्मचारी सुविधाएं बंद करके कर्मचारियों की जेब काटती जा रही है। भारत सरकार कभी नहीं सोचती है कि भीषण महंगाई में वह अपना परिवार का भरण पोषण पढ़ाई लिखाई कैसे कर पाएगा। अंग्रेजों के समय से चली आ रही पेंशन को समाप्त करके भत्तों में कटौती करना ,बायोमेट्रिक हाजिरी दो बार लगाने से कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी की गतिविधियों पर बंदिश लगाने से साफ जाहिर होता है कि सरकार निजीकरण की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है और धीरे-धीरे तमाम विभाग समाप्त करके निजी संस्थानों पूंजीपतियों को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी की गतिविधियों को समाप्त की रणनीति उसी का हिस्सा है जिससे कर्मचारी अपनी पीड़ा की आवाज भी ना उठा सके। राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी जीपीएफ में 5 लाख से ज्यादा जमा करने पर पाबंदी तथा पुरानी पेंशन बहाली न करने भत्तों में कटौती करके भारत सरकार का अनुसरण कर रही है। इस पर गंभीर विचार करने के लिए इप्सेफ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक दिल्ली में बुलाई गई है। उन्होंने सभी कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी से इस बैठक में अनिवार्य रूप से भाग लेने की अपील की है।
