बरेली: सुविधाएं पाने के लिए घिसट रहे दिव्यांग, योजनाओं का लाभ पाना हुआ मुश्किल
बरेली, अमृत विचार। रविवार को विश्व दिव्यांग दिवस है, इस दिन सरकारी विभाग दिव्यांगों के सम्मान का राग अलापेंगे, हर सुविधा उनकी चौखट तक पहुंचाने के दावे किए जाएंगे, लेकिन जमीनी सच्चाई ठीक इसके उलट है।
दिव्यांगों को सरकारी सुविधाएं पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर माह प्रत्येक सोमवार को सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग जन शिविर का आयोजन होता है। यहां घंटों इंतजार के बाद भी दिव्यांगों के हाथ मायूसी लगती है। घिसटते हुए या किसी के सहारे वे कार्यालय तक आते हैं।
सीएमओ कार्यालय में जिस कमरे में दिव्यांगों की जांच के लिए बोर्ड में शामिल सदस्य बैठते हैं, यहां दो दिव्यांगों के बैठने तक की कोई व्यवस्था नहीं है। कार्यालय के बाहर दिव्यांगों के लिए न रैंप है और न ही व्हील चेयर की व्यवस्था है। कार्यालय में ही जमीन पर घिसटते हुए दिव्यांग नजर आते हैं। पास से ही स्वास्थ्य विभाग के अफसर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनकी नजर इस ओर नहीं जाती है।
सैकड़ों की भीड़, प्रमाण पत्र बनते हैं महज 50 से 100
विकास भवन में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिले में 23097 दिव्यांग पंजीकृत हैं। अफसरों का दावा है कि ये दिव्यांग सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। वहीं, सीएमओ कार्यालय में भी हर सोमवार को सैकड़ों दिव्यांगों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन नए प्रमाण पत्र बनाने या फिर संशोधन संबंधी कार्य सिर्फ 50 से 100 दिव्यांगों के ही हो पाते हैं।
दिव्यांगजनों की सहूलियत के चलते नया प्रस्ताव तैयार कर कार्यालय को यहां से 300 बेड अस्पताल शिफ्ट करने का प्रयास है। जल्द ही शासन से स्वीकृति लेकर कार्यालय को शिफ्ट कराया जाएगा।
- डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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