अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस : राज्य पुरस्कार से सम्मानित शख्स ने साझा किया दर्द, कहा- प्रतिभा का दोहन जारी है...ऐसे पुरस्कारों का क्या...
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी में आज अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दिव्यांगों में जागरूकता लाना है। साथ ही उनके प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव करना भी है।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से आज के दिन दिव्यांगता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य कर रहे लोगों को सम्मानित भी किया जाता है। सरकार की तरफ से लोगों को यह सम्मान दिव्यंगता के क्षेत्र में किये गये विभिन्न कार्य को लेकर दिया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा समय दिव्यांगों के बेहतरी में लगा दिया। राज्य सरकार की तरफ से ऐसे लोगों को उनके कार्य के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया, लेकिन अब उन लोगों को अपमानित होना पड़ रहा। वह भी उसी जगह पर जहां पर उन्होंने काम किया और सम्मान मिला।
ऐसे ही कुछ लोगों में शामिल है प्रोस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक अरविंद निगम, जो कुछ साल पहले तक केजीएमयू के लिंब सेंटर में कार्यरत थे। यहीं पर दिव्यांगों के लिए किये गये कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था, लेकिन वह अब अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहें हैं। अपनी उपेक्षा का आरोप उन्होंने केजीएमयू प्रशासन पर लगाया है। आज के दिन उन्होंने अपना दर्द सोशल मीडिया पर भी साझा किया है।
अरविन्द निगम ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुये लिखा है कि आज अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस है जिसको पहले विश्व विकलांग दिवस के नाम से जाना जाता था, आज के दिन दिव्यांगता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य कर रहे विशेषज्ञ लोगों को अति विशिष्ट राज्य पुरस्कार से मुख्यमंत्री जी द्वारा सम्मानित किया जाएगा। पर जो हम कहना चाहते हैं वो ये है कि इतने बड़ा पुरस्कार और उपलब्धि हासिल करने के बाद भी ऐसे पुरस्कार धारकों को सरकार द्वारा उपेक्षित छोड़ दिया जाता है।
उन्होंने आगे लिखा कि ऐसे लोगों को सम्मान मिलने के बाद भी लाभ उनके सर्विस कार्यकाल में नहीं दिया जाता , जैसे जब शिक्षकों को राज्य पुरस्कार मिलता है तो उनको 1 वेतन वृद्धि, 3 से 5 साल की सेवा वृद्धि वा अन्य सुविधा मिलती है, ऐसे ही पुलिस सेवा या अन्य सेवा में जब राज्य या केंद्र पुरस्कार मिलता है तो सरकारी सेवकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रोन्नति या अन्य लाभ मिलते हैं पर दुर्भाग्य की दिव्यांगजन सेवा में कार्यरत विशिष्ट राज्य पुरुस्कार पाने वालों को सरकार कोई लाभ नहीं देती है।
ऐसा ही एक पुरस्कार से हमे दिव्यांगजन उपकरणों में शोध एवं विसिष्ट सेवा के लिए व्यक्ति विशेष सम्मान से साल 2009 में सम्मानित किया गया था, लेकिन केजीएमयू संस्था ने उसको कोई महत्त्व न देकर उस पुरस्कार की गरिमा को तार तार कर दिया, यहां तक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी 5 साल की सेवा वृद्धि नहीं दी गई। अपनी जिद पर केजीएमयू प्रशासन अड़ा है, बहरहाल सघर्ष जारी है, पर प्रतिभा का दोहन भी जारी है...ऐसे पुरस्कारों का क्या है... जो व्यक्ति की प्रतिभा पर दिए तो जाते हैं पर उनको उपेक्षित भी किया जाता है...
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