शांति के साथ सतर्कता

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Edited By Amrit Vichar
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भारत और चीन के बीच 14 घंटे की कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी तरह का बदलाव न करने और पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव में कमी लाने के लिए अग्रिम मोर्चे पर अपने और सैनिकों को नहीं भेजने का निर्णय हुआ है। सीमा …

भारत और चीन के बीच 14 घंटे की कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी तरह का बदलाव न करने और पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव में कमी लाने के लिए अग्रिम मोर्चे पर अपने और सैनिकों को नहीं भेजने का निर्णय हुआ है।

सीमा पर पिछले कई समय से चली आ रही तनातनी के बीच वार्ता के बाद इन बिंदुओं पर सहमति बनना दोनों देशों के हित में है। मगर भारत को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि चीन ने कई मौकों पर वार्ता के बावजूद पीठ में छुरा घोंपने जैसा काम किया है।

ऐसे में सतर्कता जरूरी है और देश को हमेशा ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा ताकि चीन फिर ऐसी कोई हरकत नहीं कर सके। पहले तो चीन सीमा पर शांति के लिए वार्ता की टेबल पर आने को राजी नहीं हुआ था। लगातार कई बार सीमा पर आमने-सामने सैनिकों की भिड़ंत के बाद जब कमांडर स्तर की वार्ता की बात आई तो चीन पीछे हट गया।

अब चीन ने अगर वार्ता कर कुछ बिंदुओं पर सहमति जताई है तो भारत के कूटनीतिक विशेषज्ञों को इस बात को भी समझना होगा कि कोर कमांडर स्तर की वार्ता के लिए आखिर चीन राजी हुआ है तो इसके पीछे उसकी कोई और चाल तो नहीं है। इससे पहले कई मौकों पर ऐसा हुआ जब लद्दाख सीमा पर शांति बहाली की बात हुई हो और चीन दूसरे स्थान पर सीमा में घुसपैठ की तैयारी में लगा रहा।

भारत को इस बात से सबक जरूर लेना होगा। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि वह किसी के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं। इसके मायने यह है कि चीन को मालूम था कि भारत के साथ सीमा विवाद की स्थिति पर उसकी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में भी लगातार किरकिरी हो रही थी।

वार्ता के लिए वह राजी नहीं था और सीमा पर उसके सैनिक लगातार भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश में लगे थे। लिहाजा माना जा सकता है कि एक तरफ वार्ता और दूसरी ओर चीनी राष्ट्रपति का बयान अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के साथ संयुक्त राष्ट्र में भी यह संदेश देने की कोशिश थी कि वह शांति बहाली का समर्थक है, जैसा कि है नहीं।

बहरहाल, अब जबकि छठे दौर की वार्ता के बाद जल्द ही सातवें दौर की वार्ता पर भी सहमति बनी है तो माना जा सकता कि सीमा पर शांति रहेगी। मगर चीन की धोखा देने वाली आदत के बारे में भी हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लोगों को सावधान रहना होगा।