लखनऊ : ईयर टैग से होगी पशुओं की पहचान, बिना पंजीयन नहीं मिलेगा मुआवजा
लखनऊ, अमृत विचार। अब आपदा से पशुओं की मौत होने पर पशु पालकों को सहायता राशि ईयर टैग और पंजीयन के आधार पर दी जाएगी। केंद्र व प्रदेश सरकार ने ईयर टैग को आपदा पोर्टल से लिंक किया है। नई गाइडलाइन के अनुसार छोटे और सीमांत किसान व भूमिहीन पशु पालकों को पशुओं के कानों में ईयर टैग कराने के साथ भारत पशुधन एप पर पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया है। ऐसा करने से पशु के साथ उसके स्वामी का पूरा ब्योरा ऑनलाइन हो जाएगा। इससे आपदा के समय पशुओं की पहचान आसानी से होगी और पारदर्शिता से आंकलन कर राहत आयुक्त की तरफ से सहायता राशि दी जाएगी। बिना पंजीयन व ईयर टैग पशु हानि के दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जो अब तक राजस्व और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आंकलन कर सहायता दी जाती है। पूर्व में राष्ट्रीय आपदा मोचक व राज्य आपदा मोचक निधि के मानक व दर 2022-23 से 26 तक के लिए निर्धारित की गई थी।
पहले बड़े, बाद में छोटे पशुओं का होगा ईयर टैग
अभी तक पशुपालन विभाग पशुओं का ईयर टैग और पंजीयन आईएनओएफएफ पोर्टल पर करता रहा है। अब यह कार्य भारत पशुधन एप पर करेगा। इसमें नए के साथ पूर्व का भी विवरण अपलोड होगा। जो पशु रह गए उसमें पहले चरण में गाय, भैंस, बैल जैसे बड़े पशु व बाद में भेड़, बकरी व अन्य छोटे पशुओं का ईयर टैग व पंजीयन किया जाएगा। ईयर टैग से टीकाकरण, गणना, मॉनीटरिंग, सड़कों पर घूमने के दौरान पहचान करना, तमाम योजनाएं, ऋण व बीमित पशुओं पर क्लेम मिलता है। फिर भी अफवाह के कारण पशुपालक नहीं करा रहे।
-प्रदेश में ईयर टैग की स्थिति
कुल गाय व भैंस : 5.20 करोड़
ईयर टैग वाले गाय व भैंस : 4.96 करोड़
ईयर टैग के लिए बाकी छाेटे पशु : 6.89 करोड़
वर्जन -
सभी पशुओं का ईयर टैग और पंजीयन कराना सरकार ने अनिवार्य कर दिया है। खासकर आपदा के समय ईयर टैग व पंजीयन नहीं मिला तो सहायता राशि के दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पशुपालक ईयर टैग व पंजीयन जरूर कराएं। जिससे अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल सके। -एमआई खान, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग।
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