LU 66वां दीक्षांत: दीक्षा का कभी अंत नहीं, मेडल पाने वाले मेधावियों को राज्यपाल ने वैदिक काल से जुड़े दिए सुझाव
अमृत विचार लखऊ: दीक्षांत का मतलब शिक्षा का अंत नहीं ये तो महज एक पड़ाव है शिक्षा ताे जीवंत पर्यंत जारी रहती है। राज्यपाल के इन्हीं संदेश के साथ बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 66वें दीक्षांत समारोह शुरूआत हुई। इस मौके पर राज्यपाल आनंदी पटेल ने मेडल के साथ डिग्री पाने वाले मेधावियों से कहा ये तो आपके श्रम का परिणम है। उन्होंने उपाधियों एवं पदकों में छात्राओं की संख्या ज्यादा होने पर कहा कि सभी विश्वविद्यालय में यही स्थिति है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं मिलकर आगे बढ़े यह प्रयास होना चाहिए। लेकिन आज छात्रायें तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं समृद्ध होती हैं तो दुनिया समृद्ध होती है और उनका आर्थिक सशक्तिकरण विकास को बढ़ावा देता है। राज्यपाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना के 103 वर्ष पूरे होने एवं विश्वविद्यालय द्वारा कई विद्वानों, वैज्ञानिकों, लोकसेवकों तथा विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाएं देने को गर्व का विषय बताया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को यूजीसी द्वारा एकेडमिक ऑटोनमी में ग्रेड-1 का दर्जा दिए जाने पर भी बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। एनआईआरएफ में भी 200वीं रैंक होने की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जो गौरव का विषय है।
राज्यपाल ने शैक्षणिक रूप से उच्चतर शिक्षा में पिछड़ गए लोगों में कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से पर्याप्त क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि भारत विदेशी छात्रों के लिए पुनः आकर्षण का केंद्र बन सके। इससे पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में संविधान स्थल का लोकार्पण किया और आज डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
43398 उपाधियां और 192 मेडल मेधावियों ने झटके
दीक्षांत समारोह के मोकसमारोह में राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय के कुल 107 प्रतिभाशाली मेधावियों को 192 पदक प्रदान किए, जिसमें 28 छात्र एवं 79 छात्राओं ने पदक हासिल किए। इसके साथ ही समारोह में कुल 43398 उपाधियां प्रदान की गईं, जिसमें स्नातक स्तर पर 33146 ,परास्नातक स्तर पर 10009 तथा 243 शोध उपाधि प्रदान की गयीं। सभी उपाधियां डिजिलॉकर में अपलोड कर दी गयीं। इस अवसर पर सीएमडी रेडिफ्यूजन इंडिया संदीप गोयल को कुलपति द्वारा मानद उपाधि प्रदान की गई।
उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि भारत विदेशी छात्रों के लिए पुनः आकर्षण का केंद्र बन सके। राज्यपाल ने वैदिक काल के अनुसंधानों की चर्चा करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही हमारे अनुसंधान अत्यंत समृद्ध थे। अनेक ऋषि-मुनियों का जिक्र करते उन्होंने कहा कि महर्षि भारद्वाज द्वारा विमान प्रौद्योगिकी पर किए गए शोध ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राइट ब्रदर्स के द्वारा विमान के आविष्कार से 8 वर्ष पहले ही भारत में बम्बई की चौपाटी पर 1800 फुट की ऊंचाईं पर विमान का परीक्षण किया गया था। उन्होंने कहा कि भारत में एक ही साथ जल, थल एवं नभ पर उड़ान भर सकने वाले विमान का निर्माण प्राचीन काल में ही किया जा चुका था, इसका वर्णन प्राचीन साहित्यों में मिलता है। हमें इस बात का गौरव होना चाहिए।
मेधावियों को राज्यपाल ने दिए ये अहम टिप्स
- - अपने विषय के साथ दूसरे विषय की पुस्तक पढ़ने की रुचि होनी चाहिए।
- - सशक्त युवा शक्ति से देश का विकास होता है, जनहित में कार्य करना होगा।
- - सामाजिक बुराइयों के रूप में दहेज प्रथा, बाल विवाह पर सख्ती रोक लगाने में सहयोग करें।
मुख्य अतिथि ने दी मेधावियों से की अपील
समारोह के मुख्य अतिथि व चीफ कॉर्डियो थोरेसिक सर्जरी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पद्मश्री, प्रोफ़ेसर बलराम भार्गव ने उपाधि-पदक प्राप्त छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए आजादी के 75 वर्षों में रक्षा, अंतरिक्ष, न्यूक्लियर, खाद्यान्न तथा हरित क्रांति और नीली क्रांति के क्षेत्र में देश की उपलब्धियां बताया। उन्होंने गुरु का सम्मान करने, समयनिष्ठ, सत्यनिष्ठ, ईमानदार व समाज से जुड़े रहने एवं वृक्ष लगाने हेतु विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य विशिष्ट अतिथि, रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा उपाधि व पदक प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों की परिवार, समाज व देश के प्रति जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि डिग्री की सार्थकता तभी है, जब वह समाज के कमजोर वर्ग का उत्थान तथा देश विकास में सहयोग दे सके। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने को प्रेरित किया। इस अवसर पर सीएमडी रेडिफ्यूजन इंडिया, डा0 संदीप गोयल ने विद्यार्थियों को उपाधि पदक मिलने पर प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह कई दिनों की लगातार मेहनत का परिणाम है। इस क्रम में उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव भी साझा किए।
मेधावियों ने अमृत विचार से साझा किए अपने विचार
सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं अपराजिता सिंह
अपराजिता सिंह ने एमए एआईएच से आठ गोल्ड मेडल और एक बुक प्राइज हासिल किया है। उन्होंने बताया कि वह कभी मेडल हासिल करने के लिए पढ़ाई नहीं की बल्कि नार्मल तैयारी करते हुए अपना शत प्रतिशत दिया। अभी वह नेट की परीक्षा की तैयारी कर रही है। साथ ही वह सिविल सर्विसेज की भी तैयारी करेंगी, वह आईएएस बनना चाहती है। इनके पिता निशांत कुमार सिंह प्राइवेट जॉब करते है और मां ममता सिंह गृहिणी है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र जाना चाहते हैं श्रेयांश शुक्ला
श्रेयांश शुक्ला ने एमएससी मैथमेटिक्स में चांसलर सिल्वर मेडल समेत सात गोल्ड मेडल और बुक प्राइज हासिल किया है। उन्होंने बताया कि वह रेगुलर क्लास करते थे और जो भी पढ़ाया जाता था, उसे घर पर दोबारा दोहराते जरूर थे। फिलहाल अभी नेट जेआरएफ की तैयारी कर रहे है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहते है। इनके पिता सीजीडीए में सीनियर एकांउटेंट है और मां सविता शुक्ला गृहिणी है।
आईएएस बनना चाहती है अनुष्का सिंह
अनुष्का सिंह ने एमए लोक प्रशासन में पांच गोल्ड मेडल हासिल किये है। उन्होंने बताया कि वह शुरू से ही तैयारी में जुट गयी थी और सभी क्लास नियमित रूप से उपस्थित रहती थी और जो पढ़ाया गया उसका रिवीजन किया। लक्ष्य तय कर पढ़ाई की। वह सविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है। इनके पिता अनूप कुमार सिंह बिजनेस मैन है और मां शकुन्तला वर्मा प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका है।
कॉरपोरेट सेक्टर में जाना चाहती है मुस्कान
मुस्कान कुमारी ने बीएससी पीसीएम ग्रुप में फीजिक्स और मैथ के लिए पांच गोल्ड मेडल हासिल किये है। उन्होंने बताया कि उनकी पढ़ाई आईटी कालेज से हुई है, जो चीजें समझ नहीं आती थी, उसकी तैयारी के लिए यूट्यूब मद्द लेकर तैयारी करती थी। वह एमबीए करना चाहती है, अभी कैट की परीक्षा दी है। एमबीए पूरा करके कॉरपोरेट सेक्टर में जाना चाहती है। इनके पिता प्रेमनाथ सिंह आर्मी में है और मां अर्चना देवी गृहिणी है।
मेडल पाकर फूले नहीं समायी अंशिका
अंशिका श्रीवास्तव ने एमए समाजशास्त्र में चार गोल्ड मेडल हासिल किये है। खास बात यह है कि उनके चचेरे नाना के नाम एससी शरण गोल्ड मेडल भी उन्हें हासिल हुआ। यह मेडल उन्हें सभी सेमेस्टर में प्रथम श्रेणी आने के कारण दिया गया है। नाना के नाम का मेडल पाकर वह उत्साहित है। आगे वह सिविल सर्विसेज में जाना चाहती है। इनके पिता अजय कुमार श्रीवास्तव यूपीएसआरटीसी में नौकरी करते है और मां रेनू श्रीवास्तव गृहिणी है।
प्रोफेसर बनना चाहती हैं रिचा सामंत
रिचा सामंत ने चांसलर गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने नेशनल कॉलेज बीए और लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की है। उन्होंने भविष्य में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना संजोया है। उन्हें शिक्षक बनने की प्रेरणा विश्वविद्यालय के शिक्षकों से ही मिली। वह बताती हैं कि यह उनके लिए गर्व के पल होंगे कि उन्होंने जहां पढ़ाई की है, वहीं पढ़ाने का भी मौका मिले। रिचा के पिता नरेंद्र सामंत स्पोर्ट्स आइटम की दुकान चलाते हैं और मां आनंदी सामंत गृहिणी हैं।
सेना में जाकर देश सेवा करेगी भाविनी बहुगुणा
भाविनी बहुगुणा को बेस्ट एनसीसी कैडेट के रूप में वाइस चांसलर मेडल दिया गया है। वह बीकॉम आनर्स थ्री ईयर की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सेना में अधिकारी बन देशसेवा करनी है। इसके लिए देश की और भी बेटियों को प्रेरित करूंगी। मैं सीडीएस की तैयारी कर रही हूं। हाल ही में मुझे विश्वविद्यालय की ओर से एनसीसी कैडेट के तौर पर यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत रूस भेजा गया था। इसमें मैं उत्तर प्रदेश से अकेली थी। इसके लिए मुझे राज्यपाल ने सम्मानित भी किया था। इनके पिता गिरीश चंद्र बहुगुणा प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां ऋतु नैथानी सरकारी कॉलेज में शिक्षक हैं।
न्यायिक सेवा में जाना चाहते हैं स्वराज शुक्ला
स्वराज शुक्ला ने एलएलबी पंचवर्षीय में जीएन चक्रवर्ती पदक हासिल किया है। उन्होंने बताया कि पीसीएस-जे में चयनित होकर हर व्यक्ति को न्याय मिले, इसके लिए काम करना चाहता हूं। समाज में उत्कृष्ट सेवा के जीएन चक्रवर्ती पदक के लिए चयन होना गौरव के क्षण हैं। मैंने एनएसएस से तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए लोगों की मदद की है। साथ ही कोरोना की वैक्सीन के लिए लोगों को जागरूक किया। बेरोजगारों को भी रोजगार से जोड़ने का काम किया। इनके पिता विष्णु शुक्ला शिक्षक हैं और मां राजश्री गृहिणी हैं।
पीसीएस बनना चाहती हैं शिवी गौतम
शिवी गौतम ने एमएससी सांख्यिकी में चांसलर सिल्वर मेडल समेत चार गोल्ड मेडल हासिल किये है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष मेरा चयन एसएससी सीजीएल के जरिए जनगणना विभाग में हो गया है लेकिन भविष्य में पीसीएस अधिकारी बनना है। मैं नेशनल कॉलेज से स्नातक और लविवि से परास्नातक में एमएससी की छात्रा रही हूं। इनके पिता विजय कुमार कृषि विभाग में लिपिक हैं और मां शशिलता गृहिणी हैं।
कुशल अधिवक्ता बनना चाहती है इफ्फत खान
इफ्फत खान ने एलएलबी थ्री ईयर में आठ गोल्ड मेडल हासिल किया है। वह शिया पीजी कालेज से एलएलबी पूरी की है। उन्होंने इससे पहले प्रथम वर्ष दो मेडल और द्वितीय वर्ष वाइस चांसलर ब्रॉन्ज मेडल समेत दो मेडल हासिल किया था। उन्होंने बताया कि वह कुशल अधिवक्ता बनना चाहती है। इनके पिता मुसरत अली खान प्राइवेट जॉब करते है, इनकी मां निगार खान गृहिणी है।
शिक्षा क्षेत्र में परचम लहराना चाहते हैं अमन स्वर्णकार
अमन स्वर्णकार ने एमएसएसी फीजिक्स में छह गोल्ड मेडल हासिल किये है। उन्होंने बताया कि वह लाइब्रेरी, यूट्यूब और अलग-अलग लेखकों की बुक से पढ़ाई करते थे। अब वह नेट जेआरएफ की तैयारी कर रहे है और पीएचडी करके शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहते है। इनके पिता राजकिशोर स्वर्णकार की ज्वैलरी शॉप है और मां अनु स्वर्णकार गृहिणी है।
प्रोफेसर बनना चाहती हैं आयुषी मेहरा
आयुषी मेहरा ने एमए राजनीति शास्त्र में पांच गोल्ड मेडल हासिल किये है। उन्होंने बताया कि वह जो पढ़ाया जाता था, उसे पढ़ती थी और उसका रिवीजन जरूर करती थी। साथ ही रिसर्च पेपर को भी पढ़ती थी ताकि राइटिंग स्किल बढ़ जाये। वह शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती है और इसके लिए वह नेट जेआरएफ की तैयारी कर रही है। इनके पिता राकेश बिहारी मेहरा जीजीआईसी में क्लर्क है और इनकी मां आशू मेहरा गृहिणी है।
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