Jaggery Making...ऐसे बनता है स्वादिष्ट गुड़, खाने से कई बीमारियां हो जाती हैं 'छूमंतर'!

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। गुड़ बनाने की इकाइयां यानी गन्ना कोल्हू पिछले कुछ सालों से विलुप्त से होते जा रहे हैं। एक समय था जब गांव-गांव और नगरों के बाहर सर्दियों का सीजन आने से पहले तमाम कोल्हू नजर आते थे।

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जहां आस-पास के लोगों को अच्छा-खासा रोजगार मिलता था। वहीं खाने के लिए लोग घर-घर कुंतलों से गुड़ और राब बनवाकर रखते थे। जो कई तरह के पकवान और गर्मियों में शरबत पीने के काम आती थी। लेकिन बदलते दौर में यह ट्रेंड कहीं खो सा गया है।

यही वजह है गांवों में लगने वाले कोल्हू अब इक्का-दुक्का ही बचे हैं। हालांकि अब इन कोल्हू प्लांट पर बदलते दौर के साथ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। जो कोल्हू में गन्ने की मोख लगाने के साथ ही भट्टी झोंकने, गन्ने के वेस्ट को मैदान में सुखाने समेत तमाम कार्यों को बखूबी निभा रही हैं।

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इसको लेकर बरेली के भुता कस्बे के बाहर कोल्हू चलाने वाले खंडसारी तोताराम गंगवार बताते हैं कि जब से चीनी मिलों का चलन बढ़ा है, तब से कोल्हू का कारोबार कम होता जा रहा है। लेकिन आज के समय में केवल वही कोल्हू बचे हैं जो गुड़ या राब बनाकर सीधे मंडी में सप्लाई करते हैं।

खंडसारी तोताराम गंगवार आगे बताते हैं कोल्हू आज भी किसानों के उत्थान का स्रोत बने हुए हैं, क्योंकि यहां किसान जब चाहे तब गन्ने को बेचकर फसलों में खाद-पानी के साथ तमाम घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए नकदी की व्यवस्था कर लेता है। वहीं चीनी मिलों से रिजेक्ट गन्ने को किसान कोल्हू पर बेचकर अगली फसल की तैयारी कर लेते हैं।

इतना ही नहीं चीनी मिलों से काफी दिन पहले से शुरू होकर काफी बाद तक चलते हैं और किसानों का गन्ना खरीदकर उन्हें नुकसान से बचाते हैं। अगर कोल्हू न हों तो हर साल किसानों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

खंडसारी आगे बताते हैं कि एक कोल्हू प्लांट करीब एक दर्जन से अधिक परिवारों को रोजगार देता है। जिससे लोगों को बाहर जाने की बजाय अपने आस-पास में ही काम मिल जाता है, और मजदूर अपने परिवार के साथ रहकर काम करते रहते हैं।

आपको बता दें कि भुता क्षेत्र में खंडसारी तोताराम गंगवार, दिनेश, केसरी लाल, देंवेंद्र और विनोद के कोल्हू चलाते हैं, जहां कई किलोमीटर दूर से किसान गन्ना बेचने आते हैं। आपको बता दें गन्ने के रस से शीरा, राब और गुड़ तैयार किया जाता है।

जिनका दवाओं के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सामान्य तौर पर गुड़ खाने के तमाम फायदे हैं, जिनमें सिर दर्द और फैटी लीवर समेत पेट के तमाम रोगों में लाभकारी है। लेकिन दवा के तौर पर गुड़ का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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