मुरादाबाद: लंबी ड्यूटी और लचर सिस्टम से जूझ कर जवान ने की खुदकुशी
मुरादाबाद, अमृत विचार। लचर सरकारी सिस्टम और इसके बाद ड्यूटी, गैरहाजिर या फिर थोड़ी सी लापरवाही हो तो कार्रवाई तय। कुछ यही हकीकत है खाकी की। दिनभर क्राइम कंट्रोल करने के बाद भी पुलिसकर्मी अपने हक की आवाज नहीं उठा सकते। एक दिन की छुट्टी के लिए भी उन्हें कई दरबार पर चक्कर लगाने पड़ते …
मुरादाबाद, अमृत विचार। लचर सरकारी सिस्टम और इसके बाद ड्यूटी, गैरहाजिर या फिर थोड़ी सी लापरवाही हो तो कार्रवाई तय। कुछ यही हकीकत है खाकी की। दिनभर क्राइम कंट्रोल करने के बाद भी पुलिसकर्मी अपने हक की आवाज नहीं उठा सकते। एक दिन की छुट्टी के लिए भी उन्हें कई दरबार पर चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यही वजह है कि पुलिसकर्मी खुद को तनाव में महसूस करते हैं। गुरुवार को पुलिस लाइन में हुई यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले भी पुलिसकर्मी तनाव के कारण खुदकुशी कर चुके हैं। हालांकि हर बार अफसर तनाव में आत्महत्या की बात करना तो स्वीकार करते हैं लेकिन विभागीय गलती मानने को इंकार कर देते हैं जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि हर माह तमाम पुलिसकर्मी उपचार हेतु अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं लेकिन अफसर कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
गुरुवार को लाइन में तैनात सिपाही मजर हुसैन खां ने कार्बाइन से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। इस घटना के बाद आईजी रमित शर्मा व एसएसपी प्रभाकर चौधरी समेत तमाम आला अफसर मौके पर पहुंचे। सभी ने दावा किया कि घरेलू परेशानी होने के कारण सिपाही मानसिक रूप से तनाव में चल रहा था जिस कारण उसने आत्महत्या कर ली। इतना ही नहीं आरोप यह भी लगे कि सिपाही दस दिन से बिना बताए गैर हाजिर भी था। हालांकि जब परिजन पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे तो पुलिस की कहानी कुछ अलग ही नजर आई। इस घटना से पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।
पत्नी सरकारी नौकरी में, नहीं कोई क्लेश
पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे परिजनों से गृह क्लेश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिरे से इंकार कर दिया। परिजनों ने बताया कि सिपाही के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी तुबा की शादी हो गई है जबकि एक बेटा और बेटी पढ़ाई कर रहे हैं। सिपाही की पत्नी खुद विकास भवन में सहायक लिपिक के पद पर तैनात है। मौजूदा समय में उनकी तैनाती पीलीभीत जिले में है। परिजनों ने बताया कि मजर हुसैन काफी दिनों से सीने में दर्द से परेशान थे जिस कारण अवकाश मांग रहे थे। आशंका है कि अफसरों की अनदेखी के कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया।
करीब 20 प्रार्थना पत्र हैं लंबित
कठिन ड्यूटी के बीच पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या करने के कई मामले सामने आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो ड्यूटी के कारण पुलिसकर्मी तनाव में हैं। ब्लड प्रेशर व शुगर के अलावा तमाम बीमारियों ने उन्हें घेर लिया है। उपचार के लिए अवकाश नहीं मिल पाता जिस कारण वे मानसिक तनाव में आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस लाइन में तैनात बीस से अधिक पुलिसकर्मियों ने बीमारी का हवाला देते हुए अवकाश मांगा है लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
इंद्रवीर सिंह, आरआई ने बताया कि सिपाही द्वारा आत्महत्या किए जाने की जांच अफसर कर रहे हैं। फिलहाल सिपाही के मानसिक तनाव में होने की बात कही जा रही है। रही बात बीमारी का हवाला देकर प्रार्थना पत्र की तो ऐसा कोई भी मामला लंबित नहीं है।
