बरेली: 1.40 करोड़ का बजट वापस... क्योंकि हर अफसर को नहीं चाहिए होता कमीशन
पूर्व सीएमएस के प्रस्ताव पर जिला महिला अस्पताल में दूसरे ऑपरेशन थिएटर और नए उपकरणों के लिए शासन ने भेजा था बजट
बरेली, अमृत विचार। ऐसे में जबकि कमीशन सरकारी और राजनीतिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, यदि कोई अफसर 1.40 करोड़ रुपये जैसा बड़ा बजट सरकार को यह कहकर वापस कर दे कि वह गैरजरूरी है तो इसे दुर्लभ मिसाल माना ही जाना चाहिए। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस की ओर वापस भेजा गया यह बजट अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में बने ऑपरेशन थिएटर को दोबारा शुरू करने और उसके लिए नए उपकरणों की खरीद के लिए मंजूर किया गया था। इसका प्रस्ताव उनकी पूर्ववर्ती सीएमएस डॉ. पुष्पलता शमी ने शासन को भेजा था।
सरकारी महकमों में बगैर जरूरत के करोड़ों का बजट खपा दिए जाने की खबरें आम हैं लेकिन जिला महिला अस्पताल में इसके उलट मिसाल पेश की गई है। दरअसल, इसी साल अक्टूबर में तत्कालीन सीएमएस डॉ. पुष्पलता शमी की ओर से एमसीएच विंग में के लिए नए उपकरणों की खरीद और पुराने ऑपरेशन थिएटर को दोबारा चलाने जैसे कई कामों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजकर बजट की मांग की गई थी। शासन ने भी इस प्रस्ताव का परीक्षण कराए बगैर आननफानन उसे स्वीकृति दे दी और 1.39 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया। इत्तफाक से कुछ ही समय बाद डॉ. पुष्पलता शमी को हटा दिया गया। उनके बाद सीएमएस बनाए गए डॉ. त्रिभुवन प्रसाद प्रस्ताव को देखा तो माना कि अस्पताल के लिए यह बजट पूरी तरह गैरजरूरी है। पिछले दिनों उन्होंने बजट को सरकार को वापस करने का आदेश जारी कर दिया।
यह है बजट मांगने और लौटाने की कहानी
तत्कालीन सीएमएस ने बजट के लिए शासन को भेजे प्रस्ताव में पुराने ऑपरेशन थिएटर को मरीजों के हित में दोबारा चलाने की जरूरत का जिक्र दिया था, मौजूदा सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने इस पर तर्क दिया है कि एमसीएच विंग में ऑपरेशन थिएटर चल रहा है, लिहाजा दूसरे ऑपरेशन थिएटर की जरूरत नहीं है। प्रस्ताव में दूसरी बड़ी जरूरत उपकरणों की खरीद बताई गई थी लेकिन इस पर तर्क दिया गया है कि एमसीएच विंग वर्ष 2018 में ही शुरू हुआ है, उस दौरान भी सभी नए उपकरणों की खरीद की गई थी जो अभी दुरुस्त हैं। इसलिए और उपकरण खरीदकर बेवजह बजट खपाना ठीक नहीं होगा।
शासन को भी दिखाया आईना, उपकरणोंऔर बिल्डिंग से ज्यादा स्टाफ की जरूरत
सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद की ओर से बजट लौटाने के पीछे एक और यह तर्क भी दिया है कि विभाग में मानव संसाधन यानी स्टाफ की पहले से कमी है, लिहाजा अगर एक और ऑपरेशन थिएटर शुरू करने के साथ नए उपकरण खरीद भी लिए जाएं तो उनका उपयोग कर पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में 1.39 करोड़ का बड़ा बजट मरीजों के किसी काम नहीं आएगा। सीएमएस के इस तर्क ने सरकार को भी आईना दिखाया है। सुपर स्पेशियलटी अस्पताल के नाम पर करीब 80 करोड़ की लागत से बनाए गए तीन सौ बेड अस्पताल के लिए अब तक डॉक्टरों और स्टाफ का इंतजाम नहीं हो पाया है। जिले भर में तमाम सरकारी अस्पताल भी स्टाफ न होने की वजह से मरीजों को कोई सुविधा नहीं दे पा रहे हैं।
कहा- इस बजट से पूरी हो सकती है दूसरे अस्पतालों की जरूरतें
सीएमस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि जिन सुविधाओं के लिए बजट मांगा गया था, वे अस्पताल में पहले से हैं। पुरानी बिल्डिंग में और नई सुविधाएं शुरू करना संभव भी नहीं है। इसके लिए मानव संसाधन की भी कमी है। उपकरण नए हैं और चालू हालत में हैं। जो बजट अस्पताल को दिया गया था, उसकी जरूरत नहीं थी। मरीजों के हित में इस बजट का उन सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा सकता है जिनमें कई सुविधाओं की जरूरत है- डा. त्रिभुवन प्रसाद, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
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