मुरादाबाद : नया कपूर कंपनी पुल पांच लाख लोगों का बदलेगा जीवन
पुल बंद होने से स्कूल और बाजार जाने वाले प्रभावित, विधान सभा चुनाव में उठा था मुद्दा
कपूर कंपनी पुल से गुजरते लोग।
मुरादाबाद, अमृत विचार। रेलवे स्टेशन के पश्चिम ओर स्थित बंद कपूर कंपनी पुल ने क्षेत्र के लोगों की गति रोक दी है। हालांकि, जर्जर पुल से लोग पैदल आ-जा रहे हैं। रेल प्रबंधन ने दूसरे पुल के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, लेकिन निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। लोगों में रेल प्रबंधन और जन प्रतिनिधियों के प्रति गुस्सा भी पनप रहा है। नक्शा पास होने के बाद कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में तरह- तरह की प्रतिक्रिया है। सच तो यह है कि इस पुल के बंद होने से पांच लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं।
आम चुनाव नजदीक होने के साथ लाइनपार क्षेत्र के दूसरे पुल की मांग जोर पकड़ने लगी है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि कपूर कंपनी क्षेत्र में दूसरे पुल की जरूरत को जिम्मेदार कितना जरूरी मान रहे हैं। आश्चर्य तो यह कि रेल प्रबंधन भी दावे के साथ कहने से बच रहा है। बता दें कि विधान सभा चुनाव के दौरान कपूर कंपनी पुल से सब्जी मंडी हटाए जाने का मामला उठा था। पुल पर यातायात बहाली का मुद्दा भी उठा था। तब रेलवे ने लोगों की जरूरत को देखते हुए पैदल आने जाने की छूट तो दे दी है, लेकिन दोपहिया वाहनों का आना-जाना बहाल नहीं किया।
रेल प्रबंधन की मानें तो तीन मीटर चौड़ाई वाले पुल का प्रस्ताव पास हो चुका है। राजनीतिक पैरवी और लोगों की बात का संज्ञान लेकर रेल प्रबंधन ने पुल की हामी तो भर दी है लेकिन, पुल निर्माण की सुस्ती से सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले गुस्से में हैं। सूत्रों की मानें तो 14 करोड़ की लागत से पुल निर्माण का प्रस्ताव विभाग द्वारा पास कर दिया है। पुल निर्माण की सिद्धांतत: सहमति भी मिल गयी है। लेकिन, निर्माण कार्य के टेंडर अभी पास नहीं हो पाए हैं।
पुल की स्वीकृति मिल गयी है। इस कार्य के पूर्ण होने की अवधि छह माह होती है। निर्माण कार्य के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। चार-पांच दिन के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद एजेंसी अपना कार्य शुरू करेगी। लोगों की जरूरत के मद्देनजर यह प्रस्ताव रेल प्रबंधन ने पास किया है।-सुधीर सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक
यह कहते हैं लाइनपार क्षेत्रवासी
युवा कार्यकर्ता राहुल यादव का कहना है कि रेलवे के कपूर कंपनी पुल को दोपहिया वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। दूसरे पुल को लेकर नेताओं और रेलवे के अधिकारी हर दिन लाइनपार के लोगों के लिए नए पुल की चर्चा कर रहे हैं। मगर सच्चाई क्या है? इसकी जानकारी किसी को नही है। लाइनपार की लाइफलाइन एक तरह से बंद है। क्षेत्र का विकास और कारोबार प्रभावित है।
दुकानदार देवानंद ने कहा कि यह बड़ी जरूरी मांग और सुविधा है। विधान सभा चुनाव में यह मुद्दा बना था। नगर निगम के चुनाव में भी लोगों ने मेयर के उम्मीदवारों को यह समस्या याद दिलाई। पुल बंद होने से रेलवे लाइन के पार यानी मुख्य बाजार क्षेत्र के ग्राहक यहां आते ही नहीं हैं। इस विषय को लेकर कुछ लोगों ने आवाज उठानी शुरू की है। देखिए आगे क्या होता है।
चिड़िया टोला क्षेत्र निवासी गुल्लू सैनी का कहना है कि पुल बंद होने से दुकानदारी का बुरा हाल है। हम महानगर में ही किनारे जैसे हो गए हैं। चुनाव के दौरान सभी दलों के लोग वोट लेने आते हैं, उसके बाद हमारी मांग भूल जाते हैं। चुनावों में बड़े बड़े वादे करते हुए आते हैं लेकिन, बाद में पलटकर नहीं देखते। सभी दलों में नेता राजनीति से अधिक अपना हित जानते हैं। चुनाव बाद सभी अपने कारोबार में जुटे हुए हैं।
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