सरकार की स्पष्ट मंशा है कि कृषि से किसान भाइयों का उत्पादन बढ़े, किसान सम्मान दिवस बोलीं अनुप्रिया पटेल
मीरजापुर। सेमिनार हाल, न्यू लेक्चर थिएटर काम्प्लेक्स, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बरकछा, मीरजापुर में किसान सम्मान दिवस के अवसर पर किसान मेला का आयोजन गया। इस दौरान केन्द्रीय राज्यमंत्री और सांसद द्वारा प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन करते हुए विभागों एवं एफपीओ द्वारा लगाये गये स्टाल का अवलोकन किया गया। तत्पश्चात चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में केन्द्रीय राज्य मंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री व किसानों के मसीहा स्व. चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व व उनके विचारों को उपस्थित किसानों के सम्मुख रखा गया।
केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि चौधरी चरण सिंह के जयंती पर यह कार्यक्रम होना सही मायने में बहुत ही ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी योजना भारत सरकार संचालित कर रही है, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि। उन्होंने कहा आज देश के कोने-कोने में हमारे किसान भाइयों को इस योजना के तहत संतृप्त करते हुए रू. 6000 प्रतिवर्ष उन्हें सरकार सीधे उनके बैंक के खाते में पहुंचा रही है और बड़ी संख्या में आप सभी किसान भाई उससे लाभान्वित भी हो रहे हैं।
कहा कि ऐसी एक नहीं अनेक योजनाएं हैं, सरकार की स्पष्ट मंशा है कि जहां तक कृषि का विषय है किसान भाइयों का उत्पादन बढ़े। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि की जो पद्धतियां हैं उनको भी अपनाए, और इसके साथ-साथ जैविक खेती को निरंतर बढ़ावा दे। उन्होंने विकसित भारत संकल्प यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि यह यात्रा गांव-गांव पहुंच रही है उस यात्रा में यदि आपके गांव में होगी तो आपने देखा होगा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक का छिड़काव लाइव डेमो किया जा रहा है।
उन्होंने कहां की खेती में हम कौन से नई तकनीक का उपयोग कर सकते हैं जिससे उसकी उत्पादकता बढ़ सके, और उत्पाद अधिक स्वास्थ्यवर्धक हो सके। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने नैनो उर्वरक के छिड़काव के लिए ड्रोन के प्रशिक्षण का कार्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को देने का निर्णय लिया गया है।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने किसानों सम्बोधित करते हुये कहा कि आज नई तकनीक के समय में किसानो को अधिक से अधिक जैविक खेती को अपनाने की आवश्यकता है तथा कृषि के विविधीकरण पर ध्यान देने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं धान व अन्य रेगुलर फसल के साथ ही कृषि में विवधिकरण पर ध्यान देते हुये अन्य फसलों पर भी उत्पादन करने की आवश्यकता है ताकि कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सकें।
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