Farrukhabad से Assam भेजा जाएगा 21 हजार कुंतल आलू, किसान और व्यापारियों ने मिल कर बुक कर बाई 42 डिब्बे की रैक
फर्रुखाबाद से असम भेजा जाएगा 21 हजार कुंतल आलू।
फर्रुखाबाद से असम भेजा जाएगा 21 हजार कुंतल आलू। किसान और व्यापारियों ने मिल कर बुक कर बाई 42 डिब्बे की रैक।
फर्रुखाबाद, अमृत विचार। जिले से 21 हजार कुंतल आलू असम भेजा जाएगा। जिसके लिए किसानों व व्यापारियों ने मिल कर रेलवे से एक बड़ी रैक बुक कराई है। इस रैक के लिए मंडी समिति में आलू की खरीद की जा रही है। आलू पर छाई मंदी से अन्न दाता पूरी तरह टूट चुका है। जमीन मे पैदा होने वाले आलू के ऊपर किसान आस मान के सपने देखता है। किसानों के बच्चों की पढ़ाई, लिखाई, शादी विवाह का दारोमदार आलू पर ही निर्भर है। आलू पर छाई मंदी के चलते किसानों के सपने पूरी तरह से चकनाचूर हो गए है।
अब कई किसानों और व्यापारियों ने मिल कर एक बड़ी रैक असम के लिए बुक कराई है। जिससे 21 हजार कुंतल आलू असम भेजा जाएगा। आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू वर्मा ने बताया कि मौजूदा समय मे आलू का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल चल रहा है। इस भाव से किसानों को लागत में भी घाटा पड़ रहा है। यहां से पुराने और नए आलू की दो छोटी रैके पहले भी असम जा चुकी हैं। अब किसानों और व्यापारियों ने मिल कर बड़ी रैक बुक कराई है। जिसकी बजह से आज रविवार को भी आलू मंडी खुली रही।
कश्यप कृषि फॉर्म चौकी मदमदपुर के मालिक प्रगति शील किसान नारद सिंह कश्यप ने बताया कि बड़ी रैक में 42 डिब्बे होते है। एक डिब्बा में एक हजार पैकेट आलू होता है। एक पैकेट में 50 किलो आलू भरा जाता है। इस तरह 21 हजार कुंतल आलू की खेप असम भेजी जाएगी। नारद सिंह का कहना है कि जब तक आलू पर सरकार आलू निर्यात नीति नही बनाएगी तब तक किसानों का आलू इसी तरह माटी के मोल बिकता रहेगा। सरकार को चाहिए वह आलू पर ठोस निर्यात नीति बना कर विदेशों में आलू को निर्यात करे तभी किसानों का कल्याण सम्भव है।
आलू आढ़ती अरविंद राजपूत ने बताया कि आज आलू मंडी में आलू की आमद केवल 80 ट्रक रही।इसके बाद भी आलू की लिवाली कम रही। रैक के लिए व्यापारियों ने आलू खरीदा है। आज या कल में रैक फर्रुखाबाद जंक्शन पर लग जायेगी। यदि इस रैक में किसानों के लागत के दाम निकलते दिखाई दिए तो कच्ची सीजन का पूरा आलू असम भेजा जाएगा।
असम में आलू जाने की बजह यहां की मंडी में भी आलू के भाव मे उछाल आएगा। उनका कहना है कि इससे पहले भेजी गई नए और पुराने आलू की रैक में किसान नो लास नो प्रॉफिट में लौटा है। इस बार बढ़ी रैक भेज कर ट्रायल लिया जा रहा है।
क्या कहते है जिम्मेदार
जिला आलू विकास अधिकारी रामनरायन वर्मा का कहना है कि अगैती फसल का आलू दो हजार हेक्टेयर भूमि पर बोया गया है। जिसमे 500 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खुदाई हो चुकी है। 1500 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खुदाई बाकी है। उनका कहना है कि असम में किसानों को आलू के भाव अच्छे मिलेंगे। उनका कहना है कि अभी तो यह बानगी है। अभी 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर पक्की फसल का आलू तैयार हो रहा है।
जनवरी के अंत मे उसकी भी खुदाई शुरू हो जाएगी। इस बार नए आलू में किसानों को शुरुआती दौर में ही झटका लगा है।जिससे उबारने के प्रयास किये जा रहे हैं। आलू निर्यात नीति बनाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बिदेशो में केवल हॉलैंड आलू की मांग होती है। जिसे यहां का किसान न के बराबर करता है।
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